सिविल पुलिस में आउट टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने अधिकारियों को वरिष्ठता सूची में शामिल करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मौलिक नियुक्ति पाने वालों इंस्पेक्टरों ने 24 फरवरी 2016 को जारी वरिष्ठता सूची सहित 23 जुलाई 2015 के शासनादेश को चुनौती दी है।
याचिका में वरिष्ठता सूची और शासनादेश को रद्द करने की मांग की गई है। जगेंद्र सिंह और दस अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर जस्टिस बी अमित स्थालकर ने प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग से जवाब मांगा है।
याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह और प्रोन्नति पाए इंस्पेक्टरों की ओर से अनूप त्रिवेदी तथा विभु राय ने बहस की। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने वालों को भी वरिष्ठता सूची में जगह देने के लिए 23 जुलाई 2015 को शासनादेश जारी किया। इसी क्रम में सिविल पुलिस के 500 इंस्पेक्टरों की वरिष्ठता सूची 24 फरवरी 2016 को जारी की गई। सूची में एक्स कैडर के 1994 से 2014 तक ऐसे इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया है जो नियमित संवर्ग के नहीं हैं जबकि उनसे पूर्व में नियुक्त लोगों को वरिष्ठता सूची में जगह नहीं दी गई है।
याची के वकील के मुताबिक वरिष्ठता का निर्धारण मात्र मौलिक नियुक्ति पाए इंस्पेक्टरों का ही किया जा सकता है। नियमावली 2008 तथा पुलिस सबइंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर सीनियारिटी रूल्स के अनुसार एक्स कैडर पुलिस अधिकारियों को वरिष्ठता सूची में शामिल करना गलत है।
दूसरी ओर याचिका का विरोध कर रहे अधिवक्ता विभु राय का कहना था आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाए लोग इंस्पेक्टर के पद पर कार्य कर रहे हैं। उनको वेतन भी इंस्पेक्टर पद का दिया जा रहा है। इसलिए सरकार ने उनको वरिष्ठता सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।