इन्साकॉग की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ सप्ताह में वायरस के विभिन्न राज्यों में प्रसारित स्वरूपों में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। इनकी जानकारी संक्रमण के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग में सामने आ रही है।
कोरोना वायरस में फिर से बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं। एक्सबीबी को छोड़ कोरोना के बाकी स्वरूप अब गायब होने लगे हैं। इनमें ओमिक्रॉन के दूसरे उप स्वरूप भी शामिल हैं, जिन्होंने बीते महीनों में संक्रमण बढ़ाया था।
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इन्साकॉग की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ सप्ताह में वायरस के विभिन्न राज्यों में प्रसारित स्वरूपों में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। इनकी जानकारी संक्रमण के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग में सामने आ रही है। देश के अधिकांश राज्यों में फरवरी से एक जैसा स्वरूप ही प्रसारित हो रहा है, जिसे एक्सबीबी उप-स्वरूप के रूप में जानते हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों में कोरोना के एक-दो और स्वरूप दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर केवल एक्सबीबी स्वरूप ही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में जीनोम सीक्वेंसिंग लगातार कम हो रही है। इन्साकॉग का आकलन उसी सीक्वेंसिंग के आधार पर है। ऐसे में भविष्य की स्थिति को लेकर कयास नहीं लगाया जा सकता, लेकिन इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस धीरे-धीरे नियंत्रण में आने लगा है। इंस्टिट्यूट ऑफ जेनॉमिक्स एंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद स्कारिया ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि इन्साकॉग का आकलन जीनोम सीक्वेंसिंग की छोटी संख्या के आधार पर है।
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गंभीर मामलों पर असर नहीं
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बीते कई महीनों से महामारी में जन स्वास्थ्य पर बड़ा असर दिखाई नहीं दिया है। अस्पतालों में रोगियों के भर्ती होने की संख्या भी नहीं बढ़ी है। इस साल जनवरी माह के बाद के सप्ताहों में कुछ जगहों पर संक्रमित बढ़े हैं, लेकिन गंभीर मामलों के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं है।
मध्य और दक्षिण भारत में सब गायब
इन्साकॉग की रिपोर्ट बताती है कि मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों में कोरोना के सभी स्वरूप गायब हैं। यहां बीते फरवरी माह से 100 फीसदी सैंपल में केवल एक्सबीबी स्वरूप की पुष्टि हुई है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों में 50 फीसदी सैंपल में एक्सबीबी और बाकी 50 में बीए.2.75 स्वरूप मिले हैं। ये दोनों ही ओमिक्रॉन फैमिली के हैं। जन स्वास्थ्य पर इनका असर भी गंभीर माना गया है। इनके अलावा उत्तर भारत में एक्सबीबी के साथ साथ बीक्यू सब-स्वरूप भी मरीजों में मिल रहा है।