कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि राफेल विमानों की खरीद में भ्रष्टाचार से ज्यादा गम्भीर मामला यह है कि इसमें देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार में काफी गहन विचार-विमर्श के बाद 126 विमानों की खरीद का फैसला किया गया था, लेकिन मोदी सरकार ने उस फैसले को दरकिनार करते हुए महज 36 विमानों की खरीद का करार किया।पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इस खरीद प्रक्रिया को शुरु करने के पहले वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों की राय ली गई थी।
रक्षा विशेषज्ञों से भी चीन और पाकिस्तान सीमा पर एक साथ जंग छिड़ जाने की संभावनाओं के मद्देनजर भारत की तैयारियों पर चर्चा की गई थी। इसके बाद संसद की सुरक्षा उपकरणों की खरीद से जुड़ी कमेटी में चर्चा के बाद 126 विमानों की खरीद को उचित पाया गया था। लेकिन इस सरकार ने बिना किसी प्रक्रिया के विमानों की खरीद में कटौती कर दी। अब सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने देश की सुरक्षा के साथ समझौता क्यों किया।
कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खरीद समझौता होने की जानकारी दी थी। उन्होंने सवाल पूछा और कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं सामने आकर यह जवाब देना चाहिए कि इस समझौते की जानकारी देश के रक्षा मंत्री को थी या नहीं। साथ ही, इस तरह के समझौते करने के लिए देश की संसद की रक्षा मामलों की कमेटी से भी अनुमति ली जाती है।
पीएम को बताना चाहिए कि इस मामले में विमानों की संख्या कम करने के बाद भी अनुमति ली गई थी या नहीं। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि इस मामले पर जानकारी देने के लिए सरकार ने रक्षामंत्री की बजाय देश के कृषि राज्य मंत्री को आगे भेजा। सरकार ने देशहित की बजाय अपने मित्रों के हित को ज्यादा तरजीह दी। उन्होंने कहा कि देश की डिफेंस मिनिस्टर इस समय 'डिफेंसलेस' हो गई हैं और वे मीडिया से बचती फिर रही हैं क्योंकि उनके पास इस भ्र्ष्टाचार पर जवाब देने के लिए कोई तर्क बचा नहीं है।