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खूबियों से भरा हुआ अपाचे हेलिकॉप्टर भारतीय सेना के लिए है बेहद जरूरी

Fri, 27 Jul 2018 09:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अपाचे हेलीकॉप्टर
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भारतीय सेना में शामिल होने वाला नया जंगी जहाज (हेलीकॉप्टर) अपाचे अनूठी और अपार युद्धक क्षमताओं से लैस है। अपाचे हेलीकॉप्टर भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता तो बढ़ाएगा ही इससे सेना को जमीन पर मौजूद खतरों से लड़ने में भी मदद मिलेगी। अपाचे भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को भी रफ्तार देगा। अमेरिकी सरकार भारत को छह अपाचे एएच-64ई हेलीकॉप्टर बेचने की मंजूरी पिछले महीने ही दे चुकी है। अपाचे की खासियतें साबित करती हैं कि भारतीय सेना के लिए यह हेलीकॉप्टर कितना और क्यों जरूरी है।
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अमेरिका ने इस हेलीकॉप्टर का भरपूर इस्तेमाल इराक और अफगानिस्तान में किया और इजरायल भी गाजा में इसी हेलीकॉप्टर के दम पर अपने दुश्मनों पर कहर ढाता रहा है। अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह वॉर जोन में लड़ाई के समय कतई फेल न हो। 

रफ्तार के अलावा अपाचे की सबसे खासियत इसमें लगे सेंसर हैं जो दुश्मन को आसानी से तलाश कर उसे नेस्तनाबूद करने की ताकत रखते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर में नाइट विजन सिस्टम लगा है जिससे इसके कई मारक अस्त्रों की क्षमता जरूरत यानी जंग के वक्त दोगुनी हो जाती है। ऐसी ही कई अन्य खासियतें हैं जो भारतीय सेना के लिए अपाचे को अपरिहार्य बनाती हैं। एक नजरः-
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अपाचे की खासियतें

* इसकी अधिकतम रफ्तार 280 किलोमीटर प्रति घंटा है। 
* अपाचे को रडार से पकड़ना बेहद मुश्किल है।
* सबसे खतरनाक हथियार : 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता।
* हेलीकॉप्टर के नीचे लगी राइफल में एक बार में 30 एमएम की 1,200 गोलियां भरी जा सकती हैं।
* अपाचे की फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। 
* अपाचे हेलीकॉप्टर एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है।
* नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढोने में सक्षम।
* अपाचे दुनिया के उन चुनिंदा हेलीकॉप्टर्स में शामिल है जो किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है।
 
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अपाचे का अमेरिका से भारत तक सफर

american apache
अपाचेः अमेरिका से भारत तक

महाबली अमेरिका को अपाचे बनाने का खयाल 1970 के दशक में आया, जब उसकी फौज को एएच-1 कोबरा से ज्यादा मारक हेलीकॉप्टर की जरूरत महसूस हुई। 1973 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने बेल और ह्यूजेस नामक दो कंपनियों को अपने-अपने ढंग से ऐसे हेलीकॉप्टर का मॉडल बनाने का जिम्मा सौंपा। अपाचे का उत्पादन 1983 में शुरू हुआ। 

अमेरिकी फौज में अपाचे का प्रवेश जनवरी, 1984 में हुआ। अपाचे हेलीकॉप्टर की 5 से ज्यादा किस्में विकसित की जा चुकी हैं। इस्राइल, मिस्र और नीदरलैंड भी इस ताकतवर हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि इस समझौते से पहले बोइंग और भारतीय कंपनी टाटा ने मिलकर भारत में अपाचे एएच-64ई हेलीकॉप्टर के निर्माण का फैसला किया था। बाद में अमेरिका के साथ भारत की यह डील हुई।
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