राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : पीटीआई
'तीन नए आपराधिक कानून न्यायिक प्रणाली में अहम क्षण'
उन्होंने कहा, आपको (स्नातक करने वाले छात्र) इस तरह से काम करना चाहिए कि देश का अंतिम व्यक्ति भी न्याय तक पहुंच सके। यह सुनश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित न हो। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहित, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ब्रिटिश युग के कानूनों की जगह ली है। यह देश की न्यायिक प्रणाली में एक अहम क्षण था, जब पुराने आपराधिक कानूनों को तीन नए कानूनों से बदल दिया गया, जो एक जुलाई 2024 से लागू हुए। राष्ट्रपति ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में अपराध और साक्ष्य से जुड़े बदलाव किए गए हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की बढ़ेगी मांग
राष्ट्रपति ने आगे कहा, जिन मामलों में सजा की अवधि सात साल या उससे अधिक है, उनमें अब एक फोरेंसिक विशेषज्ञ के लिए अपराध स्थल का दौरा करने और जांच करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने सभी राज्यों में समयबद्ध तरीके से फोरेंसिक सुविधाओं के विकास का प्रावधान किया है। कई कानूनों में समयबद्ध फोरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इन बदलावों से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।
संबंधित वीडियो-