केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट करते हुए कहा कि अयोग्यता का सामना करने वाले राहुल गांधी पहले व्यक्ति नहीं हैं। आश्चर्य है कि क्या कांग्रेस के कानूनी जानकारों ने नियमों की जांच की है? इसके बजाय वे खुले तौर पर ओबीसी के प्रति अपनी नफरत का बचाव कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अयोग्यता पर बड़ी बात की। उन्होंने कहा कि माननीय कोर्ट की ओर से दोषी ठहराए जाने पर निर्वाचित प्रतिनिधि खुद ही अयोग्य हो जाते हैं। ऐसा उन मामलों में होता है, जब किसी चुने हुए प्रतिनिधि को दो या दो से अधिक साल की जेल की सजा हुई हो। भारत सरकार और लोकसभा की इसमें कोई भूमिका नहीं है। यह अयोग्यता को निलंबित या रद्द नहीं कर सकता है।
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उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि अयोग्यता का सामना करने वाले राहुल गांधी पहले व्यक्ति नहीं हैं। आश्चर्य है कि क्या कांग्रेस के कानूनी जानकारों ने नियमों की जांच की है? इसके बजाय वे खुले तौर पर ओबीसी के प्रति अपनी नफरत का बचाव कर रहे हैं। इसीलिए उनकी सदस्यता गई है। यह न्यायपालिका और लोगों के प्रति घोर अनादर दिखाता है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी का मामला राजनीतिक अपरिपक्वता का है। नौटंकी और सस्ती लोकप्रियता के लिए उनके पास जो कुछ भी बचा था, उसे भी उन्होंने खो दिया।
2013 में लिली थॉमस बनाम भारत संघ के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार दिया था। इससे सजायाफ्ता विधायकों को उनकी लंबित अपील के कारण अयोग्यता से छूट मिलती थी। फैसले के अनुसार, दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्यता स्वतः प्रभावी हो जाती है। संविधान स्पष्ट रूप से संसद को उस तारीख को टालने से रोकता है, जिससे अयोग्यता प्रभाव में आती है। सदस्यता समाप्ति आदेश जारी करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बंधे हुए हैं।