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रोहिंग्या मुद्दे को हल करने में अहम भूमिका निभा सकता है भारत : गुतारेस

Tue, 02 Oct 2018 11:51 PM IST
भाषा, नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने मंगलवार को कहा कि रोहिंग्या मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या के खिलाफ हिंसा में शामिल लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इस संकट में भारत बांग्लादेश का समर्थन कर सहायता कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह सुलह के लिए म्यांमार के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। वह ‘वैश्विक चुनौतयां, वैश्विक समाधान’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।

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उन्होंने कहा कि ऐसी आबादी को इस प्रकार की भेदभावपूर्ण स्थिति में रखना उनकी स्थिति से फायदा उठाने के लिए आतंकवादी समूहों को निमंत्रण द्न् जैसा है। गुतारेस ने कहा कि भारत भविष्य में बहु-ध्रुवीय दुनिया का 'एक आवश्यक घटक' है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में चल रहे कुछ संघर्षों में 'ईमानदार मध्यस्थ' की भूमिका भी निभा सकता है।

भारत द्वारा 1996 में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद संबंधी व्यापक संधि (सीसीआईटी) को अपनाए जाने के संबंध में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विलंब का कारण देशों द्वारा आतंकवाद की परिभाषा पर सहमत नहीं होना है। गुतारेस ने कहा कि भारत सीसीआईटी का समर्थन करने में सबसे आगे रहा है और संयुक्त राष्ट्र इस संबंध में पूरी तरह से भारत का समर्थन करता है।

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राजनीतिक सुलह हो ताकि घर लौट सकें रोहिंग्या

म्यांमार में सुरक्षा बलों के हमलों के बाद अल्पसंख्यक रोहिंग्या देश से भाग गए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सात लाख से अधिक लोग म्यांमार से भाग गए और उनमें से अधिकतर बांग्लादेश में रह रहे हैं। भारत में भी 40,000 से ज्यादा शरणार्थी हैं। इस पर उन्होंने कहा, 'मैंने दुनिया में कभी भी किसी एक समुदाय के साथ इतना भेदभाव नहीं देखा, जितना रोहिंग्या के साथ हुआ है।' 

उन्होंने कहा कि रोहिंग्या लोगों के पास स्वास्थ्य व शिक्षा की सुविधाएं नहीं हैं। गुतारेस ने शरणार्थियों के उच्चायुक्त के रूप में अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि म्यांमार के राष्ट्रपति ने उनसे रोहिंग्या लोगों को अन्य देशों में पुनर्वासित करने को कहा था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, ‘मेरा काम उन्हें शरणार्थी बनाने का नहीं है। मेरी भूमिका शरणार्थियों की समस्या को हल करना है।’ उन्होंने राजनीतिक सुलह पर जोर दिया ताकि रोहिंग्या अपने देश वापस लौट सकें।
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महासचिव ने नहीं अनुमोदित की कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन की रिपोर्ट

कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के हनन पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त की एक रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन रिपोर्टों को महासचिव ने अनुमोदित नहीं किया है। भारत ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। 

उन्होंने कहा, ‘मैं मानवाधिकार आयुक्त के बारे में रिपोर्टों पर चर्चा नहीं करता। उनके पास स्वतंत्रता है। देश उन रिपोर्टों से सहमत या असहमत हो सकते हैं। उनकी रिपोर्टों को महासचिव द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता है।’ 
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