शिकागो में जन स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इन एंटीबॉडी टेस्ट को स्वास्थ्यकर्मियों पर इस्तेमाल न करें। वहीं, लारेडो में अधिकारी इस टेस्ट से संतुष्ट नहीं हैं। इनके टेस्ट पर 20% भरोसा ही किया जा सकता है जबकि कंपनी ने 97% तक सटीकता का दावा था।
गुणवत्ता से समझौता यानी खतरा...
यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा में संक्रामक रोग विशेषज्ञ मिशेल टी ऑस्टरहोम का कहना है कि तेजी के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। लोगों को नहीं मालूम है कि यह टेस्ट कितना खतरनाक हो सकता है।
एंटीबॉडी क्या है...
एंटीबॉडी वाई आकार का प्रोटीन होता है जो शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं बनाती है जिसका काम वायरस को शरीर में घुसने से रोकना होता है।
एंटीबॉडी जांच ऐसे करते हैं
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व्यक्ति के शरीर से रक्त का नमूना सीरिंज से निकाला जाता है। रक्त से एंटीबॉडीज को सिरम में लिया जाता है।
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सिरम और रक्त में मिली एंटीबॉडीज को विशेष प्रकार के प्लेट मिक्सचर में मिलाया जाता है।
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प्लेट में मौजूद तरह पदार्थ रंग बदलता है तो इसका मतलब होता है कि मरीज में रक्त में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज बन चुकी हैं।