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INS Anjadip: नौसेना में 27 फरवरी को शामिल होगा युद्धपोत अंजदीप, बढ़ेगी ताकत; जानें विशेषताएं

Tue, 24 Feb 2026 04:35 AM IST
लव गौर अमर उजाला ब्यूरो

सार

INS Anjadip: यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है। कंपनी ऐसे आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत बना रही है जिनमें से अंजदीप तीसरा है। इसे विशेष रूप से तटीय और कम गहरे पानी वाले क्षेत्रों में ऑपरेशनों के लिए तैयार किया गया है।
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पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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भारतीय नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिलने जा रहा है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत 27 फरवरी को चेन्नई में नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी शामिल होंगे। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है।
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कंपनी ऐसे आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत बना रही है जिनमें से अंजदीप तीसरा है। इसे विशेष रूप से तटीय और कम गहरे पानी वाले क्षेत्रों में ऑपरेशनों के लिए तैयार किया गया है। अंजदीप नौसेना के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था।

अंजदीप नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बना है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता को बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
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ये भी पढ़ें: Indian Navy: नौसेना को मिला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी पोत अंजदीप; बढ़ी ताकत
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मुख्य विशेषताएं
  • रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसे डॉल्फिन हंटर के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • करीब 77 मीटर लंबे इस श्रेणी के युद्धपोत वॉटरजेट से चलने वाले नौसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत हैं।
  • इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी में काम करने वाला सोनार सिस्टम लगाया गया है।
  • इससे समुद्र के काफी अंदर तक मौजूद दुश्मन के खतरों का पता लगाने और उनको नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • यह जहाज नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को भी मजबूत करेगा।
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