पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद फैले सिख विरोधी दंगों में लगभग पांच हजार निर्दोष सिखों की हत्या की बात कही जाती है। इस घटना के लगभग 35 साल बीत जाने के बाद भी अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी का कहना है कि हमारी एक पीढ़ी गुजर गई है, लेकिन उनके न्याय का इंतजार अब तक खत्म नहीं हो पाया है। हत्याओं के अपराधी नेताओं को सजा दिलवाने के लिए सिखों ने गुरुवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और कांग्रेस के नेता जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी 1984 के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल का कहना है कि कांग्रेस सरकारों से तो उन्हें पहले ही न्याय की उम्मीद नहीं थी। नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में और योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार बनने के पहले उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन केंद्र सरकार का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है लेकिन आज तक उन्होंने सिखों को न्याय देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। भोगल के मुताबिक केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने इस मामले में कोर्ट की अवमानना तक की है क्योंकि कोर्ट ने उनसे इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी जो आज तक कोर्ट में दाखिल नहीं की गई।
कानपुर में भी दंगों के दौरान 127 सिखों की हत्या कर दी गई थी। कानपुर से आए प्रदर्शनकारी गुरुदेव सिंह ने बताया कि एक नवंबर को कानपुर में सिखों का कत्लेआम किया गया था। लेकिन इस मामले में बहुत दिनों तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में जब एफआईआर दर्ज की गई तो स्टेटस रिपोर्ट में कोई पुख्ता सबूत न होने की बात कहकर केस खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि 127 लोगों की हत्या हो गई और पुलिस को कोई सबूत नहीं मिलता। उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार से कुछ उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने भी इस मामले में कोई कदम उठाने की पहल नहीं दिखाई। यह सिख पीड़ितों के साथ अन्याय है।