केंद्र सरकार दिल्ली में कुछ कठोर कदम उठाकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सहानुभूति बटोरने का अवसर देने के मूड में नहीं है। सरकार की रणनीति केजरीवाल को अपने हाल पर छोड़ने की है। हालांकि दिल्ली सरकार के मातहत कार्य करने वाले अधिकारियों में बढ़ रहे आक्रोश पर भाजपा की पैनी नजर बनी हुई है। सरकार के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि सियासी लाभ लेने के लिए केजरीवाल तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। ताकि लाभ के पद के वजह से सदस्यता गंवाने वाले 20 विधायकों के उपचुनाव में वे सहानुभूति बटोर सकें।
भाजपा रणनीतिकारों का आकलन है कि केजरीवाल की नीति अपने आप को बलि का बकरा बनाकर जनता की सहानुभूति बटोरने की है। इसलिए वे ऐसी परिस्थितियां निर्माण कर रहे हैं। जिसे लेकर केंद्र सरकार को उनके खिलाफ मजबूरी में कड़े कदम उठाना पड़े। मगर केंद्र सरकार केजरीवाल के खिलाफ अभी कोई कड़ा कदम उठाने के मूड में नहीं है। लेकिन केजरीवाल के हर कदम पर उनकी पैनी नजर बनी हुई है। दिल्ली के मुख्यसचिव की पिटाई के मामले को भी भाजपा सियासी तूल देने के बजाय मामले को नौकरशाह वर्ग के जरिए ही आगे बढ़ाए जाने के पक्ष में है।
वरिष्ठ नौकरशाहों ने अंशू प्रकाश के पक्ष की आवाज बुलंद
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें अंशू प्रकाश मामले में कम होती नहीं दिख रहीं। एक ओर उनके आवास पर जाकर दिल्ली पुलिस ने मामले की तहकीकात की है। तो दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों के वरिष्ठ नौकरशाहों ने अंशू प्रकाश के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए केजरीवाल की निंदा की है। डीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष बलविंदर कुमार ने दिल्ली मुख्यमंत्री के घर मुख्य सचिव के खिलाफ हुई कथित घटना की निंदा करते हुए कहा है कि यह बहुत शर्मनाक बात है कि चुने हुए नुमाइंदे ही मारपीट में संलिप्त हैं। तो दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्रर बीके गुप्ता ने अंशू प्रकाश के पक्ष में बयान जारी कर दिल्ली के मुख्यमंत्री से मामले में माफी की मांग की है।
उत्तर रेलवे के खेल अधिकारी के पद से सेवानिवृत रंधीर सिंह ने कहा है कि ऐसी घटना सरकार के कामकाज को प्रदर्शित करती हैं। उन्होंने कहा है कि अंशू प्रकाश के साथ हुई घटना के बाद यह लग रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का आवास असामाजिक तत्वों के सुपूर्द है। पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह बीबी शर्मा ने कहा है कि ऐसे माहौल में सिविल सेवा के अधिकारी अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर पाएंगे। उन्हें कार्य करने के लिए स्वस्थ्य माहौल बनाने की जरूरत है। वीके मेहरा, एससी तायल और बीके चौहान सरीखे वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों ने भी केजरीवाल के घर दिल्ली के मुख्यसचिव के साथ हुई घटना की निंदा की है।
दिल्ली और केंद्र के बीच शह-मात का खेल जारी
केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के खिलाफ बेशक अभी किसी कठोर कार्रवाई का मन नहीं बनाया है। मगर दिल्ली सरकार के खिलाफ नौकरशाही में बढ़ रहे आक्रोश को बड़ा दिखाकर केजरीवाल की छवि को सियासी खरोंच देने के मूड में है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र प्रसाद ने आईएएस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की बात सुनने के बाद मीडिया को संबोधित किया।
हालांकि केंद्र सरकार के सियासी दांव को मात देने की कवायद में कुछ देर बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपने उप-मुख्यमंत्री के साथ सूबे के उप-राज्यपाल से मुलाकात कर अधिकारियों के बैठक में न आने की शिकायत की।
केजरीवाल की रणनीति अंशू मामले में केंद्र और भाजपा को घेरने की है। ताकि वे उपचुनाव में सहानुभूति बटोर सकें। मुख्यमंत्री आवास पर दिल्ली पुलिस के पहुंचने के बाद केजरीवाल ने भाजपा अध्यक्ष पर सियासी वार भी किया। मगर केंद्र और भाजपा इस मामले को राजनैतिक लड़ाई के बजाय ब्यूरोक्रेटिक जंग से जोड़ना चाहती है। ताकि केजरीवाल की छवि को जनता के बीच प्रचारित कर सकें।