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राजनीति में उतरने को तैयार राजपरिवार की एक और महारानी, भाजपा और कांग्रेस दोनों के दरवाजे खुले

Tue, 28 Aug 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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राजस्थान के एक और राजपरिवार की वंशज और महारावल बृजराज सिंह की पत्नी राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। वो साल के आखिर में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव में शाही परिवार से राजनीति में एंट्री लेने जा रही हैं। इससे पहले राजेश्वरी ने किसी भी पार्टी से अपनी निष्ठा नहीं दिखाई है। वैसे चुनाव नजदीक आने से कई और शाही परिवार अखाड़े में आने की तैयारी कर रहा है। दिलचस्प बात ये है कि राजेश्वरी के लिए भाजपा और कांग्रेस दोने दरवाजे खुले हैं। ऐसे में देखना ये है कि वो किसे चुनती हैं। वैसे राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी के पास चुनाव जीतने का बढ़िया मौका है। जनता के बीच उनकी छवि एक सामान्य नागरिक की है। उनके पास न केवल राजपूत समुदाय का समर्थन है, बल्कि मेघवाल और दूसरी जातियां भी उनके साथ हैं।

 
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राजेश्वरी चुनती हैं अगर कांग्रेस का रास्ता..

वहीं इन सबके बीच बीजेपी और कांग्रेस के नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। अगर राज्य लक्ष्मी कांग्रेस से चुनाव लड़ती हैं, तो पार्टी के रूपाराम ढांड़े, सुनीता भाटी, जनक सिंह भाटी और सवाई सिंह पीठला जैसे मजबूत कैंडिडेट रेस से बाहर होंगे। एक बीजेपी नेता ने कहा, 'अगर वह बीजेपी के टिकट पर लड़ती हैं, तो डॉ. जितेंद्र सिंह, विक्रम सिंह नाचना, रेणुका भाटी और जालम सिंह जैसे दावेदारों को बैठना पड़ेगा।'
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कौन हैं राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी?

राजेश्वरी राज्य लक्ष्मी नेपाल के सिसोदिया राणा राजघराने की राजकुमारी हैं, जिनकी शादी जैसलमेर शाही परिवार के वंशज बृजराज सिंह से 1993 में हुई थी। हालांकि जैसलमेर राजपरिवार से सियासत में प्रवेश करने वाली वह पहली सदस्य नहीं हैं। 1957 में पूर्व महाराजा रघुनाथ सिंह सांसद बने थे, वहीं राजघराने के ही हुकुम सिंह 1957-67 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए विधायक रहे।
 

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जैसलमेर शाही परिवार का सियासी इतिहास

इसके बाद वर्तमान वंशज बृजराज सिंह के चाचा चंद्रवीर सिंह 1980 में विधायक निर्वाचित हुए। उनके बाद डॉ. जितेंद्र सिंह का बतौर विधायक 3 साल का छोटा कार्यकाल रहा। इसके बाद से जैसलमेर रॉयल फैमिली का कोई सदस्य चुनाव नहीं जीत सका।
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राजनीति में राजपरिवार

मौजूदा विधानसभा में भी शाही परिवारों के वंशजों का अच्छा-खासा रसूख है। इसमें सबसे प्रमुख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हैं, जो धौलपुर राजघराने की वंशज हैं। बीकानेर रॉयल फैमिली की सिद्धि कुमारी, डीग राजपरिवार की कृष्णेंद्र कौर दीपा, जयपुर राजघराने की दिया कुमारी, शाहपुरा के राव राजेंद्र सिंह और खींवसर रियासत के गजेंद्र सिंह खींवसर लोकतंत्र में 'शाही खून' की नुमाइंदगी कर रहे हैं।
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राजस्थान विधानसभा लंबे अरसे से राजपरिवार के वंशजों का ठिकाना रही है। कुछ राजघरानों के सदस्य इसे अपनी शाही विरासत को बचाए रखने का एक जरिया मानते हैं, वहीं कुछ इसे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के रास्ते के रूप में देखते हैं। लेकिन यह हकीकत है कि वह यहां पैर जमाने के लिए आते हैं।
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