धारूहेड़ा में घूम रहे कुत्ते। संवाद
तेलंगाना में जहर देकर आवारा कुत्तों को मारने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब नागरकुरनूल जिले में लगभग 100 आवारा कुत्तों को जहर देकर मारने की घटना सामने आई है। तेलंगाना में जहर के चलते पिछले साल दिसंबर से अब तक 1200 कुत्तों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने बताया कि ताजा घटनाक्रम तिम्मैपल्ली गांव का है। इस संबंध में गांव के सरपंच के बेटे समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पशु कल्याण कार्यकर्ता एम प्रीति ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 10 दिन पहले तिम्मैपल्ली गांव में लगभग 100 आवारा कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन देकर मार डाला गया और शवों को गांव से दो किलोमीटर दूर दफना दिया गया। इसके लिए 18 हजार रुपये में भाड़े के हत्यारों को बुलाया गया था।
चरकोंडा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर सरपंच के बेटे के खिलाफ हत्याओं में संलिप्तता के आरोप में केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा, पंचायत सचिव और एक ग्रामीण के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक 12 कुत्तों के शव बरामद किए गए हैं और आगे की जांच जारी है।
तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में पिछले साल दिसंबर से अब तक इस तरह 12,00 आवारा कुत्तों को मारा जा चुका है। पिछले महीने हुए पंचायत चुनावों से पहले प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने का वादा किया था, जिसे पूरा करने के लिए उन्हें मारा जा रहा है।
50 आवारा कुत्तों को जंगल में छोड़ा
वहीं एक अन्य घटना में सिद्दिपेट जिले के बोप्पापुर गांव से 50 आवारा कुत्तों को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया। पशु कल्याण कार्यकर्ता ए गौतम ने कहा कि यह कृत्य को पशु संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है। पुलिस की दी गई शिकायत में उन्होंने गांव के सरपंच और सचिव पर इस कृत्य को अंजाम देने का आरोप लगाया।