सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे किसानों की मांगों के संदर्भ में 30 जनवरी से अनशन करने पर अडिग हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर अपने गांव रालेगणसिद्धि में अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने स्थानों पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।
हजारे ने पहले भी किसानों की मांगों को लेकर अनशन करने का एलान किया था। उन्होंने कृषि कानूनों के विरोध में शुरू किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इससे पहले बीते 14 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की थी।
उसके बाद उन्होंने कहा था कि जनवरी के अंत में वह अपने जीवन का आखिरी अनशन करेंगे। इसके बाद महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश शुरू की थी। बृहस्पतिवार की सुबह भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री गिरीश महाजन एक बार फिर रालेगणसिद्धि पहुंचे और उनसे अनशन न करने की अपील की। लेकिन अन्ना नहीं माने।
अ हजारे ने बृहस्पतिवार को बयान जारी कर कहा कि पिछले चार साल से किसानों की महत्वपूर्ण मांगों पर आंदोलन कर रहा हूं। कई बार देश के प्रधानमंत्री और कृषिमंत्री के साथ पत्राचार हुआ लेकिन सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया। यह किसानों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता है।
उनकी मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, कृषिमूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा या स्वायत्तता, कृषि उपज को लागत का 50 फीसदी अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाए। 29 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इन मांगों को मानने के लिए उच्चाधिकार समिति गठित करने का लिखित आश्वासन दिया गया था।
अन्ना ने कहा कि किसानों के इन मुद्दों पर पांच बार पत्र व्यवहार किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसलिए मैने अपने जीवन की अंतिम भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।