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आत्महत्या करना चाहते थे अन्ना, फिर ऐसा क्या हुआ की बदलने चले देश

Mon, 19 Sep 2016 04:53 AM IST
रवि बुले/मुंबई
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अन्‍ना हजारे
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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की बायोपिक बन कर तैयार है। ‘अन्ना: किसन बाबूराव हजारे’14 अक्तूबर को देश भर में रिलीज होगी। पद्म श्री, पद्म भूषण से सम्मानित अन्ना पर फिल्म निर्देशक शशांक उदापुरकर ने बनाई है।
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वही अन्ना के रोल में दिखेंगे। शशांक का लुक अन्ना जैसा है। वह जब अन्ना हजारे से मिलने जाते हैं तो हजारे उन्हें देखते ही कहते हैं, ‘लो अन्ना आ गए।’ फिल्म का टीजर पिछले हफ्ते आया है।

शशांक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, ‘अन्ना भ्रष्टाचार के विरुद्ध दिल्ली के रामलीला मैदान में (2011) जिस तरह निर्णायक लड़ाई के लिए डट गए थे, उसने लाखों लोगों के साथ मुझे भी उनकी तरफ आकर्षित किया।’ कुछ मराठी फिल्में बना चुके इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर शशांक के अनुसार, ‘तभी मैंने तय किया कि मुझे अन्ना पर फिल्म बनानी है।’
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आत्महत्या करना चाहते थे

anna - फोटो : file photo
शशांक फिल्म में अन्ना का पूरा जीवन दिखा रहे हैं, जिसमें गांव में गुजरा बचपन, आंखों देखा स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय सेना में ड्राइवर की नौकरी से लेकर तमाम सामाजिक आंदोलन शामिल हैं।

फिल्म अंतत: रामलीला मैदान में उस मुकाम तक पहुंचती है जिसे लोगों ने आजादी की दूसरी लड़ाई तक का नाम दिया। यह बायोपिक अन्ना के गृहनगर रालेगण सिद्धी समेत मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से होती हुई दिल्ली तक शूट हुई है।

आत्महत्या करना चाहते थे
युवावस्था में अन्ना लोगों के अभाव-गरीबी देख कर भावुक-उदास रहते थे। उनके मन में सामाजिक/आध्यात्मिक प्रश्न उठते थे, जिनका जवाब नहीं होता था। इससे एक बार वह इतने निराश हुए कि आत्महत्या की ठान ली। जब वह प्राण देने रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो ऐसी घटना घटी जिसने उनका जीवन ही बदल दिया।

कोई सीक्रेट नहीं
शशांक कहते हैं कि अन्ना की जिंदगी खुली किताब है। फिल्म के लिए रिसर्च और मेकिंग के दौरान हुई उनसे मुलाकातों में मुझे एक भी बात ऐसी नहीं मिली कि लगे कोई सीक्रेट सामने आ गया।
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