देहरादून में छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले में उनके परिवार ने दोषी के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की है। एंजेल चकमा के परिवार ने कहा कि सभी आरोपियों के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की मांग की। एंजेल पर उसके छोटे भाई माइकल की सामने में युवकों के एक समूह ने हमला किया था। इसके बाद 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद 26 दिसंबर को एंजेल ने दम तोड़ गया। एंजेल की आखिरी इच्छा को याद करते हुए, उसके मामा मोमेन चकमा ने कहा कि उसका भतीजा नेपाल जाकर बर्फबारी देखना चाहता था।
मोमेन ने पीटीआई को बताया "उन्होंने यात्रा की तैयारी के तहत खास जूते मंगवाए थे, जब वह आईसीयू में भर्ती हुए, तब जूते पहुंचे। मैं उनकी अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए उन्हीं जूतों के साथ नेपाल जाऊंगा। "मोमेन ने आगे कहा कि, "हम एंजेल को कभी वापस नहीं पा सकेंगे, लेकिन उसका परिवार इस जघन्य हत्या में शामिल लोगों के लिए मौत की सजा या कम से कम आजीवन कारावास चाहता है। एंजेल ने बार-बार कहा था कि वह एक भारतीय है, लेकिन हत्यारों ने बेरहमी से उसकी पीठ में दो बार चाकू मारा और उसकी गर्दन तोड़ दी, जिसके कारण 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।"
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पिता कर्ज में डूबे हैं
मोमेन ने कहा कि एंजेल का परिवार अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है क्योंकि उसके पिता ने भारी कर्ज लेकर अगरतला के बाहरी इलाके नंदननगर में एक नया घर खरीदा था। उन्होंने कहा, "इसके अलावा, एंजेल ने देहरादून से एमबीए करने के लिए शिक्षा कर्ज लिया था। हम सभी जानते हैं कि देहरादून में ऐसा कोर्स करना महंगा होता है। अब सब कुछ बर्बाद हो गया है। त्रिपुरा के समाज कल्याण मंत्री टिंकू रॉय ने एंजेल की मां गौरी मति चकमा से उनके घर पर मुलाकात की और उन्हें वित्तीय सहायता के रूप में 9.12 लाख रुपये के दो चेक सौंपे।