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धोनी ने बढ़ाया 'कड़कनाथ' का क्रेज, जानें कैसे करें इस खास मुर्गे की फार्मिंग?

Thu, 03 Dec 2020 05:28 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
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महेंद्र सिंह धोनी जिस जगह हाथ डालते हैं, वहां से सोना ही निकलता है। बात चाहे क्रिकेट के मैदान की हो या अब कारोबार की। दरअसल, इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कैप्टन कूल ने मध्य प्रदेश के खास कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग क्या शुरू की, पूरे झारखंड में इस कारोबार में हाथ आजमाने वालों की तादाद बढ़ गई है। वैसे भी कहते हैं कि ब्रांड बिकता है। ऐसे में अगर किसी को माही जैसे करामाती ब्रांड का साथ मिल जाए तो फिर कहना ही क्या? उस पर कड़कनाथ तो खुद ही अच्छा खास ब्रांड है। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग कैसे करें और इसकी खासियत क्या हैं? 
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झारखंड में बढ़ा कड़कनाथ का क्रेज

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बता दें कि माही से प्रेरित होकर झारखंड के गढ़वा में भी पशु पालकों ने कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग चालू कर दी है। इसमें गढ़वा कृषि विज्ञान केंद्र भी मदद कर रहा है, जिससे गढ़वा के लोग भी पौष्टिक, प्रोटीन और कम कोलेस्ट्रोल वाले देसी मुर्गे और कड़कनाथ मुर्गे का सेवन कर सके। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जिले में तीन जगहों पर इसकी शुरुआत की है। इसके मेराल में संगबरिया पोल्ट्री फार्म सुर्ख़ियो में है। इसकी वजह कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग है। कई लोग इसे देखने भी आ रहे हैं।
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इस वजह से खास है कड़कनाथ मुर्गा

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बता दें कि कड़कनाथ भारत का एकमात्र काले मांस वाला मुर्गा है। दूसरे मुर्गों के मुकाबले ये सिर्फ चार से पांच महीने में तैयार हो जाता है और बाजार में यह 1500 से 1800 रुपये में बिक जाता है। गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना काल के चलते पोल्ट्री कारोबार भी मंदी की चपेट में है। इसके बावजूद कड़कनाथ मुर्गा पालने वाले किसान फायदा उठा रहे हैं। अपनी खासियत के चलते कड़कनाथ की डिमांड दिनोंदिन बढ़ रही है।

बीमारियां भी ठीक करता है कड़कनाथ

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

गढ़वा के किसानों का कहना है कि उन्होंने कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग धोनी से प्रेरित होकर शुरू की है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक भी हमारी मदद कर रहे हैं। वहीं दूसरे किसान बताया कि इस मुर्गे के सेवन से कई बीमारियां दूर होती हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक सुषमा बखाल ने बताया कि जिले के मेराल प्रखंड के संगबारिया में पशु किसानों को उन्नत किस्म के मुर्गे-मुर्गियों की ब्रीड दी जा रही है। जब वह बड़े हो जाएंगे तो इसे अन्य किसानों के बीच बांटा जाएगा। इससे इनका प्रोडक्शन बढ़ेगा। 

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ऐसे कर सकते हैं कड़कनाथ की फार्मिंग

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जानकारी के मुताबिक, कड़कनाथ मुर्गे के खान-पान में कोई ज्यादा खर्च नहीं आता है। यह हरे चारे में बरसीम, बाजरा चरी बड़े ही चाव से खाते हैं। अगर इनको बाग में शेड बनाकर पाला जाए तो भी इन पर कोई खर्च नहीं है। इसके अलावा कड़कनाथ की फार्मिंग के लिए कई संस्थान प्रशिक्षण भी देते हैं। इसके अलावा समय-समय कृषि विज्ञान केंद्र में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा राज्यों के पशुपालन विभाग में भी इसकी पूरी जानकारी ले सकते हैं।

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