महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दिवंगत अजित दादा पवार की यह दिली इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आएं। उनके मुताबिक, इस दिशा में लगभग फैसला हो चुका था और केवल औपचारिक घोषणा बाकी रह गई थी।
विलय को लेकर पहले ही बन चुकी थी सहमति
अनिल देशमुख ने कहा कि अजित दादा पवार ने एनसीपी और शरद पवार गुट के विलय के लिए कई दौर की बातचीत की थी। इसके लिए उनकी जयंत पाटिल समेत अन्य नेताओं के साथ बैठकें भी हुई थीं। देशमुख के अनुसार, पहले यह तय हुआ था कि नगर निकाय चुनावों के बाद, 20 जनवरी तक दोनों दलों के एक होने की घोषणा कर दी जाएगी। बाद में जिला परिषद चुनाव अचानक आने से यह फैसला टल गया और फरवरी के दूसरे सप्ताह तक इसका ऐलान होना था।
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हादसे के बाद टल गया बड़ा राजनीतिक फैसला
देशमुख ने कहा कि दुर्भाग्य से इससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया, जिसमें अजित दादा पवार का निधन हो गया। अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला परिवार और वरिष्ठ नेताओं की सहमति से लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शरद पवार, सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार, जय पवार और परिवार के अन्य सदस्य एक साथ बैठकर इस पर विचार करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि तीन-चार दिन बाद इस दिशा में कोई निर्णय सामने आ सकता है।
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने पर खुशी
अनिल देशमुख ने कहा कि अगर सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो यह बेहद खुशी की बात होगी। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं बल्कि परिवार की सहमति और सम्मान के साथ लिया जाएगा। देशमुख के अनुसार, अजित दादा के जाने से जो खालीपन बना है, उसे भरने के लिए संवेदनशील और संतुलित निर्णय जरूरी है।
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पिंकी माली के परिवार से मिले देशमुख
अनिल देशमुख ने अजित पवार के साथ हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाली क्रू मेंबर पिंकी माली के परिवार से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पिंकी माली का परिवार गहरे सदमे में है। देशमुख ने परिवार को ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि इस दुख की घड़ी में वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने हादसे में पायलट, को-पायलट, अन्य क्रू सदस्य और सुरक्षाकर्मी की मौत पर भी गहरा शोक जताया।
देशमुख ने कहा कि अजित दादा पवार महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में अपनी कार्यक्षमता और नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। उनका अचानक जाना राज्य की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में एनसीपी और महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं, जिनकी नींव अजित दादा पहले ही रख चुके थे।
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