पहले जानें- अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम चर्चा में क्यों?
अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम जेएनयू की तरफ से उन्हें प्रोफेसर पद से बर्खास्त करने और उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद से चर्चा में है। दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई।
कौन हैं अंगोमचा बिमोल अकोइजम?
- अकोइजम ने 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में पीएचडी की थी। वे जेएनयू के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर रहे हैं।
- उनके पास 16 साल का अध्यापन और अनुसंधान का अनुभव है। उन्होंने सामाजिक एवं राजनीतिक मनोविज्ञान और सांस्कृतिक अध्ययन में शोध किया है।
- वे लोकसभा में इनर मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आए सांसद हैं। उन्होंने 2024 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी।
अकोइजम को किस मामले में आरोपी बनाया गया, केस क्या?
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर 11 अक्तूबर 2026 को दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और धारा 79 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा/लज्जा को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर कम से कम 11 छात्राओं ने इससे जुड़े आरोप लगाए हैं।
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छात्राओं की तरफ से क्या आरोप लगाए गए?
- शिकायतकर्ता छात्राओं का आरोप है कि उन्हें बैठकों या चर्चाओं के बहाने कैंपस स्थित उनके आवास पर बुलाया जाता था और यौन उत्पीड़न का प्रयास किया जाता था।
- आरोप है कि अकोइजम अकादमिक मूल्यांकन और वाइवा परीक्षाओं को देर रात (रात 11:40 बजे तक) अपने निजी आवास पर आयोजित करते थे।
- कक्षाओं में अनुचित/अश्लील टिप्पणियां करने और छात्राओं से उनके निजी जीवन (जैसे बॉयफ्रेंड, डेटिंग हिस्ट्री आदि) के बारे में अनुचित सवाल पूछने का आरोप।
- जेएनयू की आंतरिक जांच समिति की जांच के मुताबिक, अकोइजम पर अवांछित शारीरिक संपर्क और शिक्षक-छात्र संबंधों की सीमाओं के उल्लंघन के आरोप पाए गए हैं।
उन्होंने जेएनयू की कुलपति के उन दावों को झूठा बताया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और कोई गवाह पेश नहीं किया। अकोइजम ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 31 मई को लिखित जवाब दिया था, 16 जुलाई को खुद बयान दर्ज कराया था और 14 अगस्त को उनके गवाहों के बयान दर्ज हुए थे। उन्होंने 300 ईमेल भेजने के कुलपति के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें केवल 43 ईमेल मिले थे, जिनका उन्होंने जवाब दिया था।
अकोइजम ने आरोप लगाया कि स्थापित नियमों और कानूनों को दरकिनार कर विश्वविद्यालय को खाप पंचायत की तरह चलाया जा रहा है और मीडिया ट्रायल के जरिए गैर-मौजूद आरोप फैलाए जा रहे हैं। अकोइजम ने कहा कि उनकी लीगल टीम इस प्रक्रियात्मक अनियमितता और आरोपों को कानूनी रूप से चुनौती देगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वे मणिपुर की जनता की आवाज हैं और राजनीतिक दबाव में उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता।
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