ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में साक्षरता दर में ज्यादा है लेकिन आंध्र प्रदेश में साक्षरता दर भारत के बाकी राज्यों की साक्षरता दर से काफी कम है। मौजूदा समय में दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश की साक्षरता दर 66.4 फीसदी है, जो कि बिहार से भी कम है।
बिहार की साक्षरता दर 70.9 फीसदी, तेलंगाना की 72.8 फीसदी है, कर्नाटक की 77.2 फीसदी, असम की 85.9 फीसदी और उत्तराखंड की 87.6 फीसदी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से शिक्षा पर जारी की गई रिपोर्ट बताती है कि जब साक्षरता की बात आती है तो विकसित राज्य की धारणा गुमराह कर सकती है।
हमेशा की तरह केरल बाकी सभी राज्यों से साक्षरता दर में बहुत आगे है। केरल की साक्षरता दर 96.2 फीसदी है, इसके अलावा राज्य में महिला और पुरुष के बीच साक्षरता का अंतर सबसे कम यानि कि 2.2 फीसदी है। अगर पूरे देश की बात करें तो ये अंतर 14.4 फीसदी का है, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 84.7 फीसदी और महिला साक्षरता दर 70.3 फीसदी है।
वहीं आंध्र प्रदेश में महिला और पुरुष के बीच साक्षरता दर का अंतर 13.9 फीसदी है, जबकि राजस्थान में 23.2 फीसदी, बिहार में 19.2 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 18.4 फीसदी है। आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी राज्य ऐसे हैं, जहां साक्षरता दर बेहतर स्तर पर है।
इसके अलावा शहरी और ग्रामीण साक्षरता में भी उतना ही अंतर है, जितना महिला और पुरुष के बीच है। लेकिन एक बार फिर केरल इस अंतर को मात देकर पहले नंबर पर खड़ा होता है। केरल में यह अंतर केवल 1.9 फीसदी का है। वहीं तेलंगाना में शहरी साक्षरता, ग्रामीण साक्षरता से कहीं ज्यादा है।
जेंडर का मिला-जुला असर और शहरी-ग्रामीण साक्षरता में झुकाव का मतलब है कि शहरी पुरुष साक्षरता और ग्रामीण महिला साक्षरता के बीच का अंतर 27.2 फीसदी है, ये अंतर राष्ट्रीय स्तर पर है और चिंताजनक है। अगर अलग-अलग राज्यों की बात करें तो ये और भी खराब हो सकता है।
चार बड़े शहरों में पुरुष साक्षरता दर 90 फीसदी के नीचे हैं, जबकि सिर्फ अकेले केरल में ग्रामीण महिला साक्षरता दर 80 फीसदी है और 22 में से 13 राज्यों में 70 फीसदी से कम है।