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Anantnag: जंगल में डटकर लड़ने वाले हरावल दस्ते की कहानी; हेलीकॉप्टर गिराने का सामान भी लिए थे दहशतगर्द

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 15 Sep 2023 04:50 PM IST

सार

आतंकी पहाड़ी पर छिपे थे, ये बात तो मालूम थी। उनके पास भारी हथियार हैं, रॉकेट लांचर हैं या मशीनगन, इसका कोई अंदाजा नहीं था। घने जंगल में पहाड़ी पर छिपे पाकिस्तानी दहशतगर्दों तक पहुंचने के लिए सेना के 'हरावल' दस्ते ने आठ किलोमीटर की पैदल दूरी तय की थी।
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Anantnag Encounter - फोटो : Amar Ujala


आतंकी पहाड़ी पर छिपे थे, ये बात तो मालूम थी। उनके पास भारी हथियार हैं, रॉकेट लांचर हैं या मशीनगन, इसका कोई अंदाजा नहीं था। घने जंगल में पहाड़ी पर छिपे पाकिस्तानी दहशतगर्दों तक पहुंचने के लिए सेना के 'हरावल' दस्ते ने आठ किलोमीटर की पैदल दूरी तय की थी। जैसे ही 'फ्रंटफुट' पर 'हरावल' दस्ता, पहाड़ी पर चढ़ने लगा तो आतंकियों ने स्नाइपर अटैक कर दिया। उन्होंने कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोनैक और डीएसपी हुमायूं भट को घायल कर दिया। आतंकियों के पास मौजूद भारी हथियारों एवं गोला बारूद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सेना के हेलीकॉप्टर तक को गिराने का प्रयास किया। 


दहशतगर्दों ने ऊंचाई का फायदा उठाया

सुरक्षा बलों से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है, गडोले क्षेत्र में दहशतगर्दों के छिपे होने का इनपुट मिला था। वहां तक वाहन के जरिए पहुंचना संभव नहीं था। कर्नल मनप्रीत सिंह, इस आपरेशन को लीड कर रहे थे। उनके साथ मेजर आशीष धोनैक और डीएसपी हुमायूं भट भी फ्रंटफुट पर थे। जैसे ही 'हरावल' दस्ते ने पहाड़ी पर दहशतगर्दों की ओर बढ़ना शुरु किया तो दहशतगर्दों ने ऊंचाई का फायदा उठाते हुए फायरिंग शुरु कर दी। चूंकि तीनों जांबाज अधिकारी 'हरावल' दस्ते में थे, इसलिए वे आतंकियों के निशाने पर आ गए। सैन्य दस्ते में जो आगे चलता है, उसे 'हरावल' कहा जाता है। जंगल इतना गहरा था कि जवाबी फायरिंग में टारगेट तक नजर नहीं आ रहा था। आतंकी तो पहले से ही ऊंचाई पर थे। वे सेना व पुलिस को सटीक देख रहे थे, मगर खुद घने वृक्षों की ओट में छिपे थे। 


तब 'लाइन लैंथ' व प्लान बिगड़ गया था

आठ किलोमीटर पैदल चलने के बाद जब 'हरावल' दस्ते ने आतंकियों की तरफ बढ़ना शुरु किया तो उस वक्त तक सब रणनीति के तहत हो रहा था। आतंकी, ऊंचाई पर थे। उस वक्त आपरेशन की 'लाइन लैंथ' व प्लान, बिगड़ जाता है। ये नहीं मालूम होता कि अब गोली किस तरफ से आएगी। गोली का निशाना कौन बनेगा, ये सब बातें तय नहीं होती। एक तरह से इसे वॉर जोन कह सकते हैं। उस वक्त दिमाग में यही रहता है कि दुश्मन कैसे खत्म होगा। फ्रंटफुट पर चल रहे 'हरावल' दस्ते में शामिल जांबाजों के ऊपरी हिस्से में गोली लगी थी। वह जगह इतनी संकीर्ण थी कि वहां से घायलों को बाहर निकालना आसान नहीं था। ऊंचाई पर बैठे आतंकी, टारगेट शॉट मार रहे थे। वजह, उन्हें सब कुछ साफ नजर आ रहा था। जब निकटवर्ती बेस पर हेलीकॉप्टर उतारने का प्रयास किया गया तो दहशतगर्दों ने जबरदस्त फायरिंग कर दी। पहले प्रयास में ही हेलीकॉप्टर नहीं उतर सका। 


रॉकेट लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल

शुक्रवार को भी दहशतगर्दों की तरफ से फायरिंग जारी थी। सैन्य बलों ने आतंकियों को खत्म करने के लिए रॉकेट लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल किया। चूंकि आतंकियों के पास छिपने के लिए एक संकरी गुफा जैसा ठिकाना था, इसलिए उन्हें बाहर निकालना आसान नहीं था। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद ली गई थी, लेकिन इसमें भी कामयाबी नहीं मिली। घने जंगल में कुछ नजर नहीं आ रहा था। यही वजह रही कि सेना ने रॉकेट लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल किया है। अब पहाड़ी के दूसरे हिस्से पर भी जवानों को उतारा गया है। सूत्रों का कहना है, बहुत जल्द दहशतगर्दों का ख़ात्मा होगा।

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