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Explainer: धड़ल्ले से बिक रहा बिना दूध वाला पनीर, इस पर प्रतिबंध क्यों नहीं, महज पांच राज्यों में सख्ती क्यों?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 17 Aug 2026 11:53 AM IST

सार

बिना दूध के बनने वाले एनालॉग पनीर पर एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बाद उत्तर प्रदेश ने भी कार्रवाई का फैसला किया है। जानें असली, नकली और एनालॉग पनीर में अंतर और एफएसएसएआई के नियम।
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एनालॉग पनीर पर बढ़ रही कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला
भारत में बीते कुछ दिनों में 'पनीर' पर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, एक के बाद एक चार राज्यों ने अब दूध के इस्तेमाल के बिना बनने वाले पनीर, जिसे एनालॉग पनीर की संज्ञा भी दी जाती है, पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें सबसे ताजा नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां मिलावटी डेयरी उत्पादों और एनालॉग पनीर को लेकर सख्त नियमों का एलान किया है। वहीं, इससे कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, इसके प्रचार-प्रसार और बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी। तीन अन्य राज्य- गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने भी एनालॉग डेयरी उत्पाद पर कुछ इसी तरह की कार्रवाई की है।

नियामकों का बीते कुछ ही महीनों में आया यह एक्शन अपने आप में चौंकाने वाला है, क्योंकि बिना दूध से बने पनीर यानी डेयरी के बाहर बनाए गए पनीर पर रोक या इसे गलत बताने का अब तक राष्ट्रीय स्तर पर नियम नहीं है। यानी इसकी बिक्री को केंद्र की तरफ से भी कानूनी तौर पर गलत नहीं माना जाता। 
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एनालॉग पनीर पर बढ़ रही कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला
भारत में बीते कुछ दिनों में 'पनीर' पर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, एक के बाद एक चार राज्यों ने अब दूध के इस्तेमाल के बिना बनने वाले पनीर, जिसे एनालॉग पनीर की संज्ञा भी दी जाती है, पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें सबसे ताजा नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां मिलावटी डेयरी उत्पादों और एनालॉग पनीर को लेकर सख्त नियमों का एलान किया है। वहीं, इससे कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, इसके प्रचार-प्रसार और बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी। तीन अन्य राज्य- गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने भी एनालॉग डेयरी उत्पाद पर कुछ इसी तरह की कार्रवाई की है।

नियामकों का बीते कुछ ही महीनों में आया यह एक्शन अपने आप में चौंकाने वाला है, क्योंकि बिना दूध से बने पनीर यानी डेयरी के बाहर बनाए गए पनीर पर रोक या इसे गलत बताने का अब तक राष्ट्रीय स्तर पर नियम नहीं है। यानी इसकी बिक्री को केंद्र की तरफ से भी कानूनी तौर पर गलत नहीं माना जाता। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस पनीर को लेकर बीते कई महीनों से पूरे भारत में चर्चाओं का दौर जारी है और जिसकी गुणवत्ता के परीक्षण को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स चर्चाएं करते रहते हैं, वह क्या है? भारत में इस वक्त मुख्य तौर पर कितनी तरह के पनीर बाजार में बिक रहे हैं? डेयरी यानी दूध से बने पनीर में, नॉन-डेयरी यानी बिना दूध वाले पनीर और पूरी तरह नकली पनीर में अंतर क्या है? नॉन डेयरी पनीर को नकली क्यों नहीं माना जाता? इसके अलावा इनमें से हर एक पनीर की मौजूदगी किस हद तक वैध है और क्यों बाजार में बिक रहा बिना दूध से बने पनीर पर बवाल छिड़ा हुआ है? इनकी पहचान के तरीके क्या हैं और कानून इनके इस्तेमाल और प्रतिबंध पर क्या कहता है? आइये जानते हैं...
 

पहले जानें- भारत में कितनी तरह के पनीरों की चर्चाएं?

  • पारंपरिक या असली पनीर
  • पूरी तरह से ताजे दूध से बनाया जाता है, जिसे नींबू के रस, सिरके या सिट्रिक एसिड जैसे खाद्य-ग्रेड एसिड की मदद से फाड़कर तैयार किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रूप से दूध का फैट और प्रोटीन पाया जाता है। 
  • यह पारंपरिक पनीर भारत की खाद्य नियामक संस्था- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के सुरक्षा मानकों (2011) के तहत पूरी तरह विनियमित डेयरी उत्पाद है।

 

एनालॉग पनीर
  • यह एक गैर-डेयरी विकल्प है, जिसे असली पनीर जैसा दिखने, छूने और स्वाद देने के लिए डिजाइन किया जाता है, लेकिन इसमें दूध के तत्वों को पूरी तरह या आंशिक रूप से बदल दिया जाता है। 
  • इसे बनाने के लिए पाम ऑयल या वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर्स जैसी गैर-डेयरी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ जगहों पर इन चीजों के साथ दूध के पाउडर (सॉलिड मिल्क) का इस्तेमाल होता है।
  • भारत में इसका निर्माण और बिक्री कानूनी रूप से वैध है, बशर्ते इसे स्पष्ट रूप से नॉन-डेयरी या एनालॉग के रूप में चिह्नित किया गया हो, ताकि उपभोक्ता भ्रमित न हों। हालांकि, इस नियम का पालन न के बराबर ही है।

मिलावटी या नकली पनीर
  • यह पूरी तरह से अवैध और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, जहां घटिया या हानिकारक पदार्थों को असली पनीर बताकर बेचा जाता है। 
  • इसे बनाने में डिटर्जेंट, सिंथेटिक दूध, यूरिया, कॉस्टिक सोडा, घटिया वनस्पति तेल, मैदा/आरारोट (स्टार्च), औद्योगिक एसिड या फॉर्मेलीन और अतिरिक्त प्रिजर्वेटिव्स जैसी हानिकारक चीजों की मिलावट की जाती है। 
  • इसके अलावा, जब होटल या रेस्रां ग्राहकों को जानकारी दिए बिना चोरी-छिपे असली पनीर की जगह एनालॉग पनीर परोसते हैं, तो वह भी कानूनन नकली पनीर और खाद्य धोखाधड़ी के तहत आता है।

असली पनीर में, नॉन-डेयरी पनीर और नकली पनीर में अंतर क्या? 

असली पनीर, नकली पनीर और एनालॉग पनीर का फर्क। - फोटो : अमर उजाला

नॉन डेयरी पनीर को नकली-अवैध क्यों नहीं माना जाता? 

नॉन-डेयरी पनीर यानी एनालॉग पनीर को भारत में कानूनन नकली या अवैध नहीं माना जाता है, क्योंकि खाद्य नियामक संस्थाओं की तरफ से इसे डेयरी विकल्प के रूप में एक वैध खाद्य उत्पाद की मान्यता दी गई है। 

1. एफएसएसएआई की ओर से स्वीकृत
एफएसएसएआई ने ऐसे खाद्य उत्पादों को विनियमित करने के लिए डेयरी एनालॉग की एक आधिकारिक श्रेणी बनाई है। एफएसएसआई के नियमों के मुताबिक, अगर किसी उत्पाद में दूध के तत्वों, जैसे मिल्क फैट या प्रोटीन को आंशिक या पूरी तरह से गैर-डेयरी सामग्रियों से बदला जाता है, तो उसे बाजार में बेचना पूरी तरह वैध है। 

उदाहरण के लिए यह व्यवस्था बिल्कुल वैसी ही है, जैसे आइसक्रीम की जगह वनस्पति फैट से बने फ्रोजन डेजर्ट को और सोयाबीन से बने सोया पनीर को कानूनी रूप से बाजार में बेचा जाता है।

2. इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्रियां भी वैध
एक वैध और लाइसेंस प्राप्त फैक्ट्री में साफ-सफाई के साथ बनाया गया एनालॉग पनीर खाने के लिए असुरक्षित नहीं माना जाता। इसे बनाने में पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर, स्टेबलाइजर्स और मिल्क सॉलिड्स जैसी खाद्य-उपयुक्त (फूड ग्रेड) सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। 

इसके उलट नकली या मिलावटी पनीर पूरी तरह से अवैध है, क्योंकि उसमें यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक दूध और कास्टिक सोडा जैसी जहरीली और औद्योगिक चीजें मिलाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हैं।

3. पारदर्शिता और लेबलिंग के सख्त नियम
एफएसएसएआई के नियमों के तहत एनालॉग पनीर की बिक्री केवल तभी वैध है जब पैकेट पर स्पष्ट रूप से नॉन-डेयरी या एनालॉग लिखा हो। एफएसएसएआई के नियमों के मुताबिक, निर्माताओं को पैकेट पर यह लिखना अनिवार्य है कि इसमें दूध की जगह कौन से तत्व इस्तेमाल हुए हैं और यह भी लिखना होता है कि इसमें कोई दूध नहीं या कितना दूध पाउडर है। ताकि उपभोक्ता जागरूक होकर अपनी पसंद का चुनाव कर सकें।

अगर एनालॉग पनीर वैध है तो इस पर बवाल क्यों?

एनालॉग पनीर कानूनन वैध होने के बावजूद असली पनीर नहीं कहा जाता। दरअसल, पनीर असल रूप से दूध का उत्पाद ही माना जाता है। दूसरी तरफ बाजार में बड़ी मात्रा में इसी दूध से बने पनीर की जगह एनालॉग पनीर बिक रहा है, जिसका सही खुलासा भी नहीं किया जाता। इसी वजह से अब बड़े स्तर पर भारत में गैर-डेयरी पनीर पर बवाल शुरू हो गया है। 
  • कानून के मुताबिक, एनालॉग पनीर केवल तभी वैध है जब उसे पैकेट पर स्पष्ट रूप से नॉन-डेयरी या एनालॉग के रूप में लेबल किया गया हो। लेकिन असली समस्या यह है कि कई होटल, रेस्त्रां, कैटरर्स और क्लाउड किचन सस्ते मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को बिना बताए, असली पनीर की जगह खाने में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल कर रहे हैं। एफएसएसएआई के नियमों के मुताबिक, किसी भी एनालॉग उत्पाद को सीधे पनीर के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है।
  • इसके अलावा असली डेयरी पनीर बनाने की लागत ज्यादा होती है और ब्रांडेड पनीर बाजार में लगभग 400 से 500 रुपये प्रति किलो मिलता है। इसके उलट पाम ऑयल, स्टार्च और एडिटिव्स से बनने वाला एनालॉग पनीर बाजार में लगभग 150 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध हो जाता है। रेस्त्रां मालिक असली पनीर के पैसे लेकर ग्राहकों को आधा सस्ता नकली विकल्प परोसते हैं। कई बार ग्राहकों को इसकी जानकारी मिल जाती है, ऐसे में इस पर बवाल बढ़ता जा रहा है। 

  • भारत में शाकाहारियों के लिए पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का एक बेहद अहम स्रोत है। असली पनीर के उलट एनालॉग पनीर में प्राकृतिक डेयरी प्रोटीन न के बराबर होता है। इसमें पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड वसा (वनस्पति घी) का इस्तेमाल होता है, जिससे शरीर में हानिकारक ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से इसे खाने से हृदय रोग, शरीर में सूजन और पेट की गंभीर बीमारियां (जैसे अपच, उल्टी, दस्त) हो सकती हैं।
  • एनालॉग पनीर का एक बड़ा हिस्सा असंगठित और गैर-लाइसेंस वाली फैक्ट्रियों में गुपचुप तरीके से बनता है, जो इनके नकली होने का शक बढ़ाता है। इन असुरक्षित जगहों पर घटिया स्तर के तेलों-स्टार्च के इस्तेमाल का खतरा होता है, जिससे उत्पाद में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। देश भर में हाल ही में हुए छापों ने इस घोटाले की गंभीरता को उजागर किया है। उदाहरण के लिए, अहमदाबाद, नोएडा और पुणे में हजारों किलो संदिग्ध पनीर जब्त किया गया। 

नकली-मिलावटी पनीर पर कार्रवाई का दायरा। - फोटो : अमर उजाला

पनीर, एनालॉग पनीर और नकली पनीर का स्वास्थ्य पर क्या असर? 

असली पनीर 
असली डेयरी पनीर कैल्शियम और उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है। भारत की एक बड़ी शाकाहारी आबादी के लिए यह दैनिक पोषण और प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूरा करने का एक स्वस्थ व आवश्यक जरिया है। ताजे दूध से प्राकृतिक रूप से बने होने के कारण यह शरीर को ऊर्जा देता है और सामान्य स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

नॉन-डेयरी या एनालॉग पनीर 
इसमें प्राकृतिक डेयरी प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व न के बराबर या बेहद कम होते हैं, जिससे शरीर को कोई खास पोषण नहीं मिलता। इसे बनाने में पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड वसा (वनस्पति घी) का भारी इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से शरीर में ट्रांस फैट और खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी ऊपर होता है। यानी जहां एक तरफ व्यक्ति को लग रहा है कि वह पनीर खाकर हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत कर रहा है तो वहीं असल में उसकी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल ऊपर दिखे। 

एनालॉग पनीर में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे लंबे समय में डायबिटीज, कैंसर और दिल की गंभीर बीमारियों के पैदा होने का खतरा रहता है। इसके ज्यादा सेवन से पेट फूलना, अपच, जी मिचलाना, दस्त और उल्टी जैसी पेट की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा चूंकि एनालॉग पनीर का एक बड़ा हिस्सा बिना निरीक्षण वाली फैक्ट्रियों में बनता है और इसकी पैकेजिंग तक नहीं होती, अस्वच्छ प्रोसेसिंग से इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

नकली या मिलावटी पनीर
  • नकली पनीर पूरी तरह से जहरीले रसायनों और अखाद्य पदार्थों की मिलावट से तैयार होता है। इसमें मिलाए जाने वाले डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध से गंभीर पेट दर्द, उल्टी जैसी तात्कालिक समस्याएं होती हैं और लंबे समय में शरीर के अंदरूनी अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचता है। 
  • इसमें इस्तेमाल होने वाला यूरिया और कास्टिक सोडा लीवर और किडनी के लिए बेहद घातक हैं और इन्हें पूरी तरह से खराब कर सकते हैं। इस तरह के पनीर को खराब होने से बचाने में फॉर्मेलिन और प्रिजर्वेटिव्स से कैंसर होने, लीवर खराब होने और गंभीर एलर्जिक रिएक्शंस होने का जोखिम रहता है।
  • नकली पनीर को असल की तरह दिखाने और इसका वजन बढ़ाने के लिए, इसमें घटिया स्टार्च (जैसे अरारोट या मैदा) पोषण को खत्म कर देता है और संवेदनशील पाचन तंत्र वाले लोगों में पेट की गंभीर बीमारियां पैदा करता है।

एनालॉग पनीर-नकली पनीर की बिक्री पर कब हो सकती है कार्रवाई?

1. एनालॉग पनीर पर कार्रवाई कब-क्यों होती है?

डेयरी पनीर के नाम से बेचने पर: एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी चीज, जैसे चीज एनालॉग पनीर को सीधे पनीर के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है। कोई भी कंपनी या दुकानदार इसे असली डेयरी पनीर के रूप में प्रचारित करके नहीं बेच सकता।

मेन्यू कार्ड या बिल पर घोषणा न करना: महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की एफडीए गाइडलाइंस के तहत अगर कोई होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर्स, ढाबा या क्लाउड किचन अपने व्यंजनों में एनालॉग पनीर का उपयोग करता है, तो उसे अपने मेन्यू कार्ड, बिल और डिस्प्ले बोर्ड पर इसका स्पष्ट रूप से खुलासा करना होगा। ऐसा न करने पर ग्राहकों को गुमराह करने के आरोप में कार्रवाई होती है।

लेबलिंग नियमों का उल्लंघन: अगर पैकेट बंद एनालॉग पनीर पर स्पष्ट रूप से नॉन-डेयरी या एनालॉग नहीं लिखा है, या उसमें इस्तेमाल की गई गैर-डेयरी सामग्रियों का विवरण का प्रारूप गायब है, तो निर्माताओं पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा अगर बिना किसी वैध इनवॉइस, बैच नंबर या मैन्युफैक्चरिंग विवरण के खुले रूप में एनालॉग पनीर का परिवहन और सप्लाई की जाती है, तो कानूनन उसे जब्त करने का भी नियम है।


2. नकली या मिलावटी पनीर पर कार्रवाई का क्या तरीका?

खाद्य एजेंसियां कई बार नकली और मिलावटी पनीर को पकड़ने के लिए अभियान चलाती हैं। अगर लैब टेस्ट में पनीर के अंदर यूरिया, डिटर्जेंट, आदि हानिकारक केमिकल पाए जाते हैं तो इसे तुरंत जब्त कर लिया जाता है। साथ ही इन्हें बनाने वालों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इसका एक हालिया उदाहरण उत्तर प्रदेश के नोएडा में मिला, जहां खाद्य विभाग की औचक छापेमारी और जांच में 83% पनीर नमूने मानकों पर फेल पाए गए और 40% असुरक्षित घोषित हुए थे। इसके बाद इनके उत्पादक और इनसे जुड़ी दुकानों पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया।

एनालॉग पनीर पर बढ़ रही कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला

किन-किन राज्यों ने अब एनालॉग पनीर पर नकेल कसी?

मध्य प्रदेश: खाद्य विभाग के आदेश में कहा गया है कि ऐसे सभी एनालॉग या गैर-दुग्ध खाद्य उत्पाद प्रतिबंधित रहेंगे, जो किसी दुग्ध उत्पाद की नकल करते हों या उपभोक्ता को वास्तविक डेयरी उत्पाद होने का आभास कराते हों। खासतौर पर वे उत्पाद जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या बिक्री का तरीका उपभोक्ता को भ्रमित करता है, इस प्रतिबंध के दायरे में होंगे। 

छत्तीसगढ़: यहां राज्य सरकार ने 1 अगस्त 2026 से गैर-मानकीकृत डेयरी एनालॉग उत्पादों, जिसमें एनालॉग पनीर, मलाई और मक्खन शामिल हैं, पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल की रोक लगाई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए 6 महीने की जेल और ₹1 लाख के जुर्माने से लेकर, उम्रकैद और न्यूनतम ₹10 लाख तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

गुजरात: गुजरात सरकार ने भी राज्य के पूरे क्षेत्र में पनीर, क्रीम, बटर या अन्य डेयरी उत्पादों की नकल करने वाले गैर-मानकीकृत एनालॉग उत्पादों के निर्माण, प्रोसेसिंग, भंडारण, बिक्री और फूड रेस्टोरेंटों में इनके उपयोग पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश: इस लिस्ट में सबसे ताजा नाम उत्तर प्रदेश का जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि किसी डेयरी या निर्माण इकाई में हानिकारक रसायन या विदेशी वसा (जैसे पाम तेल, डिटर्जेंट आदि) की मिलावट पाई जाती है, तो केवल सैंपल लेकर छोड़ने के बजाय यूनिट को तुरंत बंद कर दिया जाएगा। मिलावटखोरी में शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। 

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