संस्थाओं की परंपरा और उनकी विरासत
इस खुले पत्र में टीएन शेषन और एन गोपालस्वामी जैसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने लोकप्रियता या सुर्खियों के बजाय निष्पक्षता और कड़ाई से नियमों का पालन कराया। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि भारत की संस्थाओं को राजनीतिक हमलों का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, यही परंपरा देश को मजबूत बनाती है।
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चुनाव आयोग से पारदर्शिता जारी रखने की अपील
वरिष्ठ नागरिकों ने चुनाव आयोग से कहा कि वह पारदर्शिता बनाए रखे, सभी आंकड़े सार्वजनिक करे और आवश्यक होने पर कानूनी तरीकों से अपना बचाव करे। इसके साथ ही राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे 'बिना सबूत वाले आरोपों' की जगह नीतिगत विकल्प और देश के लिए ठोस दृष्टि पेश करें।
'लोकतंत्र मजबूत है, लोग समझदार हैं'
वहीं इस पत्र के आखिरी में देश की वरिष्ठ हस्तियों ने भारतीय सेना, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विशेष रूप से चुनाव आयोग पर अपना अटूट विश्वास जतााया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और अब समय आ गया है कि राजनीति नाटकीयता नहीं, बल्कि सत्य, विचार और सेवा के आधार पर आगे बढ़े।
राहुल गांधी ECI पर बेबुनियाद हमले कर रहे हैं- ढींगरा
वहीं इस मामले में पूर्व न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा ने कहा, 'पिछले कुछ समय से, विपक्ष के नेता (लोकसभा सांसद राहुल गांधी) नियमित रूप से भारत के चुनाव आयोग पर बेबुनियाद हमले कर रहे हैं। वह एसआईआर के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। केवल एक नासमझ व्यक्ति ही एसआईआर के खिलाफ विरोध कर सकता है। केवल आतंकवादी ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जिसमें वे 'बम' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। हमें संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के ऐसे व्यवहार को न तो माफ करना चाहिए और न ही बर्दाश्त करना चाहिए।'
'राहुल गांधी ने एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया'
इस मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा, 'हम अपने देशवासियों को यह बताना चाहते हैं कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय सेना और फिर सर्वोच्च न्यायालय की निष्पक्षता पर भी हमला किया। अगर चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एसआईआर कर रहा है, तो वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है। जिन लोगों ने धोखाधड़ी से वोटिंग कार्ड का दुरुपयोग किया है, उन्हें भारत में चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एक बांग्लादेशी या रोहिंग्या को भारत में चुनाव में वोट क्यों देना चाहिए? राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को निशाना बनाकर एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया। उन्हें एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। जब आप (कांग्रेस) 60 साल तक सत्ता में थे, तब बूथ कैप्चरिंग और पुनर्मतदान होता था... राहुल गांधी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाले चुनाव आयोग के बारे में क्यों रो रहे हैं? उन्हें अपना अतीत देखना चाहिए।'
अपने आरोपों में संयम बरतें- विक्रम सिंह
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने इस मामले में कहा, 'मैं हाइड्रोजन बम और परमाणु बम निर्यात करने की बात कहने पर कड़ी आपत्ति जताता हूं। हमें अपनी न्यायपालिका, चुनाव आयोग और कार्यपालिका पर पूरा भरोसा है। चुनाव आयोग की ईमानदारी पर सवाल उठाना और यह कहना कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन पर कार्रवाई की जाएगी, बेहद गलत है और विपक्ष के नेता को ऐसी बातें कहने का कोई अधिकार नहीं है। न केवल देश, बल्कि हम सभी एकजुट हैं, और इसीलिए हमने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। कृपया अपने आरोपों में संयम बरतें क्योंकि उनमें कोई दम या तथ्य नहीं है।'