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लॉकडाउन के चलते अकेले छूट गए जानवरों का सहारा बना फ्रेंडिकोस

Thu, 28 May 2020 11:11 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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ऐसे समय में जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है और सभी लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं, गलियों के कुत्ते और अन्य जानवर उनके ही हाल पर छूट गए हैं। न उन्हें सड़कों पर खाना मिल रहा है और न ही ऐसे लोग घर से बाहर आ रहे हैं जो इन्हें कुछ खिला दिया करते थे। ऐसे में ये कुत्ते जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

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इस संकट के समय में एनिमल वेलफेयर संगठन फ्रेंडिकोस ने ऐसे सभी जानवरों की देखभाल और इलाज कराने का फैसला किया है। फ्रेंडिकोस के सदस्य पूरी तरह से इन मूक जानवरों की मदद के लिए तत्पर हैं। जब स्वास्थ्य कर्मी इंसानों की जान बचाने में जुटे हैं तो फ्रेंडिकोस इन जानवरों की मदद करने में लगा है। 

फ्रेंडिकोस के दिल्ली एनसीआर, गुरुग्राम और नोएडा के अलावा पोर्ट ब्लेयर और अन्य स्थानों पर शेल्टरों और अस्पतालों में 1800 जानवरों को रखने की क्षमता है। फ्रेंडिकोस ने अभी तक दिल्ली-नोएडा में 1500 कुत्तों, गुरुग्राम में 200 से ज्यादा गायों, बंदरों, नीलगायों के साथ 125 घोड़े और गधों के लिए भोजन की व्यवस्था की है।  
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संगठन की एक टीम दिल्ली में जंगपुरा मेट्रो स्टेशन से कुत्तों को खाना खिलाते हुए स्कोप कॉमप्लेक्स, जेएलएन स्टेडियम और आसपास के इलाकों में चलती है। वहीं दूसरी टीम विनोबापुरी, श्रीनिवासपुरी, हरि नागार्जुन सागर, आश्रम, सिद्धार्थ एक्सटेंशन, दिल्ली जल बोर्ड, भगवान नगर, विद्युत विहार, सराय काले खां बस टर्मिनल होते हुए प्रगति मैदान और आईटीओ तक कुत्तों को खाना खिलाती है। 

जानवरों की मदद को समर्पित यह संगठन इनके लिए 800 किलो से ज्यादा खाना रोजाना तैयार करवा रहा है। इसके साथ ही फ्रेंडिकोस की एंबुलेंस जानवरों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। जानवरों को खाना खिलाने जाते समय या वापसी में अगर कोई बीमार कुत्ता मिलता है तो उसे भी लाया जाता है और उसका इलाज कराया जाता है। 

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