अमृतपाल की गिरफ्तारी को लेकर जिस तरह से बीती रात चर्चाएं शुरू हुई और अंततः वह सुबह मोगा के रोड़े गांव से गिरफ्तार हुआ वह एक साथ कई इशारे करता है। सुरक्षा मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि भिंडरावाले के गांव में स्थित गुरुद्वारे के भीतर मौजूद सिख संगत को संबोधित करना और फिर अपनी गिरफ्तारी देना बताता है कि अमृतपाल किस तरीके से अपने मिशन को जिंदा रखना चाहता है। उक्त अधिकारी का मानना है कि भिंडरावाले ने ही खालिस्तान की मांग के नाम पर पंजाब में माहौल बिगाड़ा था। वो कहते हैं कि उसी भिंडरावाले के गांव से अपनी गिरफ्तारी देकर अमृतपाल न सिर्फ जनभावनाओं के साथ खेल रहा था बल्कि उनको हवा भी देने की कोशिश में लग गया।
सुरक्षा मामलों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि भिंडरावाले के गांव से गिरफ्तारी देने का मतलब स्पष्ट है कि वह "मिशन खालिस्तान" के मुद्दे को जिंदा रखना चाहता है। वो कहते हैं कि अगर ऐसा ना होता तो अमृतपाल कहीं से भी अपनी गिरफ्तारी दे सकता था। लेकिन उसने उस गांव को चुना जो भिंडरावाले का ही गांव है।
पंजाब के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी एएन सिद्धू कहते हैं कि जिस तरह अमृतपाल ने खालिस्तान की मांग को पंजाब में हवा दी और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की उसके बाद एक न एक दिन तो उसकी गिरफ्तारी होनी तय थी। लेकिन वह यह भी मानते हैं कि इतने दिनों में न सिर्फ धर्म के नाम पर युवाओं को गुमराह किया बल्कि भिंडरावाले के नाम से पंजाब के कुछ युवाओं को अपने साथ जोड़कर कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करना शुरू कर दिया।
सिद्धू का मानना है कि अमृतपाल में इसीलिए अपनी गिरफ्तारी के लिए रोडे गांव का चयन किया ताकि वह अपने समर्थको के अंदर यह संदेश दे सके कि वह भिंडरावाले की उस खालिस्तान की मांग को जिंदा रखने की कोशिश में लगा हुआ है जिसके लिए कानून व्यवस्था भी ताक पर है। वो कहते हैं कि पंजाब में खालिस्तान की मांग करने वाले भिंडरावाले के कई समर्थक मौजूद है। उनका कहना है कि यही वजह है कि अमृतपाल ने भी भिंडरावाले का लुक रखकर ही युवाओं को अपने साथ जोड़ने की मुहिम भी चलाई थी।
इस पूरे मामले में शुरुआत से नजर रखने वाले पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी भी मानते हैं कि अमृतपाल ने भिंडरावाले के गांव से समर्पण करके यह जताने की कोशिश तो जरूर की है कि वह मिशन खालिस्तान को जिंदा रखना चाहता है। उनका कहना है कि पुलिस ने अमृतपाल के उन सभी चुनिंदा चेहरों को या तो जेल के पीछे भेज दिया है या उनकी धरपकड़ जारी है जो इस अभियान को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम पर कानून व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि पंजाब पुलिस की शुरुआती लापरवाही के चलते ही "मिशन खालिस्तान" की मांग को अमृतपाल ने बढ़ावा दिया। अमृतसर के एक पुलिस स्टेशन में हुई घटना उसी लापरवाही का सबसे बड़ा नतीजा थी। लेकिन बदलते हालातों में केंद्रीय जांच एजेंसियों से लेकर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने माहौल को बिगड़ने नहीं दिया।
इस पूरे मामले में शुरुआत से नजर रखने वाले वरिष्ठ पंजाब के पत्रकार रमनजीत ढिल्लो का मानना है कि जिस तरह अमृतपाल ने भिंडरावाले के गांव स्थित गुरुद्वारे से मौजूद संगत को संबोधित करके उसने सरेंडर भले ही किया हो लेकिन अपने मिशन को पीछे नहीं छोड़ने वाला। ढिल्लो का कहना है कि अमृतपाल की गिरफ्तारी से पहले के बने माहौल में पुलिस बल की जांच के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौतियां नजर आ रही हैं। वो कहते हैं कि जिस तरीके से अमृतपाल ने माहौल बनाकर अपनी गिरफ्तारी दी और अपील की कि उसके मिशन को आगे बढ़ाना है वह ना सिर्फ पुलिस के लिए चुनौती है बल्कि आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था के लिहाज से बहुत पैनी नजर रखने की आवश्यकता बताती है। अमृतपाल ने गुरुद्वारे से संबोधित करते हुए संगत से नशा छोड़ने और अमृत ग्रहण करने की बात कही थी।