देश के विकास में स्वास्थ्य क्षेत्र का बड़ा योगदान है और यह मंत्रालय सरकार की प्राथमिकताओं में काफी ऊपर है। बावजूद लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं।राज्यों में इलाज की आधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं है और दिल्ली में सबको इलाज मिल नहीं पाता। केन्द्र की अपनी परेशानी है कि केन्द्रीय योजनाओं को लागू करने में राज्य सरकार की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जाती और उसकी सही मॉनिटरिंग होती है तो केन्द्र फंड रोकने के अलावा कुछ नहीं कर पाता। इन चुनौतियों के बाद आम लोगों के स्वास्थ्य की जरुरतों को कैसे पूरा किया जाएगा इस पर केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा से अमर उजाला संवाददाता पवन कुमार ने विस्तृत बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश......।
प्रश्न- विदेशों से आने वाली महंगी दवा और मेडिकल इक्युपमेंट को सरकार भविष्य में क्या ड्यूटी फ्री कर सकती है, जिससे आम लोगों को सस्ती दवा और इलाज मिल सके?
उत्तर-इसके लिए पॉलिसी इनीसिएटिव लिए जा रहे हैं। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अमृत नाम से एक दवा की दुकान शुरुआत की गई है। अमृत दुकान सभी केन्द्रीय अस्पताल में खोलने की तैयारी है। 14 दुकान तुरंत खोलने जा रहे हैं। 309 दुकान इसी वित्तीय वर्ष में खोलने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्यों को जगह देनी होगी। राज्य जहां-जहां कहेगी केन्द्र अमृत दुकान शुरू करने के लिए तैयार है। अमृत दुकान में कैंसर की दवा 90 फीसदी तक और इंप्लांट के उपकरण 60 फीसदी तक सस्ती दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रश्न-एम्स जैसे संस्थान में इलाज कराना बेहद मुश्किल है, ओपीडी में इलाज मिल भी गया तो सर्जरी के लिए लंबी तारीख, गंभीर मरीजों को भी दाखिला नहीं मिल पाता।
उत्तर- वाजपेयी जी की सरकार में छह एम्स की घोषणा हुई थी उसको शुरू करा दिया। 11 नए एम्स को मंजूरी मिल गई और उसे वित्तीय अनुदान भी दे दिया गया, जमीन पर काम चल रहा है। अब ऋषिकेश से मरीज दिल्ली नहीं आते, लखनऊ से मरीज नहीं आते। बिहार को पटना के अलावा एक अन्य एम्स की अनुमति दी है और वो जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहे, एक साल हो गए।
प्रश्न-भारत का रिसर्च में फोकस कम है और हम पश्चिमी देशों के शोध के आधार पर ही आगे बढ़ते हैं, शोध को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की क्या योजना है?
उत्तर-रिसर्च में हम कहीं पीछे नहीं हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्य है हम उसी सिस्टम को फॉलो करते हैं। रिसर्च में टीबी और एचआईवी की दवा सारे अफ्रीका में हम दे रहे हैं, पश्चिमी देश हमसे दुखी हैं। इंडियन फॉकोलॉजी वेस्टर्न कंट्री के लिए एक चुनौती है। हमारी दवाईयां पश्चिमी देशों को चैलेंज दे रही है। अमेरिका में हमारे फार्माकोलॉजी इंडस्ट्री की मार्केट है, क्योंकि कॉस्ट इफेक्टिव और क्वालिटी ड्रग्स हमारे लोगों ने रिसर्च की है।
प्रश्न-एनडीए सरकार के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं? कौन सा ऐसा काम जो आप करना चाहते थे लेकिन किसी कारण से नहीं कर पाए?
उत्तर- पब्लिक हेल्थ का प्रोग्राम रूटीन इम्युनाइजेशन, एक साल में पांच से 7 फीसदी टीकाकरण बढ़ा दिया, एलगभग 45 लाख नए बच्चों को पूरा टीकाकरण कर दिया। एक करोड़ 62 लाख बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाया जो छूटे हुए थे। रोटा वजायरस व पेंटावेलेंट वैक्सीन को नेशनल इम्युनाइजेशन कार्यक्रम में शामिल किया।
प्रश्न-नीट पर राज्यों ने अपनी राय दे दी है अब केन्द्र सरकार का इस पर क्या रुख है? क्या इस वर्ष नीट के तहर परीक्षा संभा नहीं है?
उत्तर- दो दिन का समय दे दीजिए फैसला हो जाएगा, बस दो दिन। नीट को लागू करने के लिए हम प्रतिबध हैं।
प्रश्न-छात्र राजनीति के बाद हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री इसके बाद देश के स्वास्थ्य मंत्री अब इससे आगे क्या? सभी की एक महत्वकांक्षा होती है?
उत्तर-हम कभी आगे नहीं देखते, हम अभी और अभी देखते हैं, यही मेरे जीवन का तरीका है, पहली बात मैं अपने बारे में कभी नहीं सोचा, दूसरी बात मैं कभी भी कोई चीज प्लान नहीं करता, हमको जो काम दिया जाता है एक सिपाही के नाते उसे पूरा करता हूं और ये मेरा ट्रैक रिकार्ड है, मैं ऐसे नहीं बोल रहा हूं। मेरा जीवन आंदोलन में गुजरा है, आंदोलन करने वाला कल की नहीं सोचता। जब लोग आईएएस की तैयारियां कर रहे थे और हम भी कर सकते थे, लेकिन मैं उस समय आंदोलन कर रहा था।