कांग्रेस पंजाब चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करना चाहती है, लेकिन करीब तीस सीटों पर पेंच फंसा हुआ है। कुछ सीटों में तीन से
पांच मजबूत दावेवारों के चलते स्क्रीनिंग कमेटी को फैसला लेने में दिक्कतें आ रही हैं।
बुधवार को एक बार फिर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई, जिसमें कुछ नामों पर सहमति बनी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि टिकट को लेकर कोई विवाद नहीं है। स्क्रीनिंग कमेटी का काम लगभग पूरा हो गया है।
चार-पांच दिनों में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होनी है। वहीं, कैप्टन ने उम्मीदवारों की सूची दो हिस्सों में आने के संकेत दिए। कांग्रेस इस बार लीक से हटकर उम्मीदवारों पर जल्द फैसला लेना चाह रही है, लेकिन कैप्टन के विरोधी खेमे के अड़ जाने से आलाकमान ने कुछ सीटों पर फैसला फिलहाल टाल दिया है।
सभी वर्तमान 42 विधायकों का टिकट लगभग तय है। कैप्टन विरोधी लॉबी बाहर से आने वाले अकाली और अन्य नेताओं को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि कैप्टन ने अधिक से अधिक सीटें जिताकर लाने का तर्क देकर अपने फैसले को सही ठहराया है। कांग्रेस हर हाल में पंजाब जीतना चाहती है, लिहाजा आलाकमान कैप्टन को भरोसे में लेकर चल रही है।
दूसरी ओर बुधवार को कैप्टन के दिल्ली आवास पर पूर्व सांसद अमरीक सिंह आलीवाल और आम आदमी पार्टी के करीब रहे व्यापारी नेता महेश अग्रवाल ने कांग्रेस
की सदस्यता ग्रहण कर ली। क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर कैप्टन का कहना है कि वह जल्द ही पार्टी में शामिल होंगे। कैप्टन ने इस दौरान नाभा जेल ब्रेक की
जांच दोबारा कराने की बात भी कही।
कैप्टन ने नोटबंदी पर चीफ जस्टिस को लिखा पत्र
नोटबंदी को लेकर आम लोगों की दिक्कतों को देखते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
और पंजाब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। कैप्टन ने कहा है कि कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि नोटबंदी से अमीर नहीं, गरीब प्रभावित हो रहे
हैं।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कैप्टन ने कहा कि पंजाब चुनाव में नोटबंदी खुद-ब-खुद मुद्दा बन जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरों में लोग आसानी से खरीद फरोख्त
और रोजमर्रा के कामकाज कर रहे हैं, लेकिन गांवों में किसान, मजदूर और सुदूर आदिवासी खुद को कैशलेस से कैसे जोड़ेंगे। लोगों के भूखों मरने की नौबत है। ऐसे में
कोर्ट को दिशा निर्देश देने चाहिए।
उन्होंने पीआईएल दायर करने की संभावना से भी इंकार नहीं किया। सरकार को जब मालूम था कि बाजार में मौजूद 86 प्रतिशत नोट, जो 500-1000 के थे, वापस ले रही है तो कम से कम 80 फीसदी करेंसी की व्यवस्था तो की होती।