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अपने ब्लॉग में बिग बी ने किया बोफोर्स विवाद का जिक्र

Fri, 01 Apr 2016 04:33 AM IST
एजेंसी / मुंबई
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बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन (बिग बी) ने कहा है कि बोफोर्स मामले में उन्हें और उनके परिवार को आरोपी बनाने के बाद उनके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गया था। उन्होंने कहा कि निर्दोष होने के बावजूद उन्हें इस मामले से निकलने में कष्टपूर्ण 25 साल लगे। अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा है, ‘जब बोफोर्स घोटाले में मेरे परिवार और मुझ पर आरोप लगे तो उन्होंने हमारे अस्तित्व को अब तक के सबसे बुरे रंगों में रंग दिया।
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25 साल बाद इस मामले के अभियोजक ने सच्चाई सार्वजनिक की,  ‘बच्चन परिवार को फंसाया गया था। 25 साल बाद...।’ पीकू फिल्म में काम कर चुके 73 वर्षीय बच्चन ने कहा कि तकनीक के इस युग में आरोप लगाना काफी आसान हैं और लोग हमेशा वास्तविकता की जांच करने की कोशिश भी नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद काफी तेजी से फैलते हैं और एक ऐसा बवंडर उठता है कि न केवल आंखों से दिखना बंद हो जाता है बल्कि सभ्यता और शिष्टाचार की बुनियाद भी समाप्त हो जाती है।
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स्वीडन के व्हिसल ब्लोअर ने अमिताभ बच्चन को 2012 में क्लीन चिट दे दी थी लेकिन बच्चन का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक झूठ और धोखे के बोझ के नीचे रहना पड़ा। उन्होंने लिखा है, ‘जब इसका खुलासा हुआ तो उन्होंने मेरी प्रतिक्रिया के बारे में पूछा।

मैं क्या प्रतिक्रिया दे सकता हूं... कोई व्यक्ति क्या कह सकता है... क्या कोई 25 साल के मेरे दर्द को मिटा सकता है... क्या वे बदनामी के दाग को हटाने में सक्षम होंगे।’
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अमिताभ बच्चन का नाम डालने के लिए डाला गया था दबाव

अमिताभ बच्चन - फोटो : सभी तस्वीरेंः अमिताभ के ब्लॉग और ट्विटर से
स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने 2012 में बताया था कि इस मामले में अमिताभ बच्चन का नाम घसीटने के लिए उन पर दबाव डाला गया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय अधिकारी उन पर भरोसा नहीं करते थे क्योंकि उन्होंने अमिताभ बच्चन का नाम बोफोर्स मामले से जोड़ने से इनकार कर दिया था।
  क्या था बोफोर्स मामला? 1986 में भारत ने स्वीडन से लगभग 400 बोफोर्स तोप खरीदने का सौदा किया था जिसकी कीमत तकरीबन एक अरब तीस करोड़ डॉलर थी। बाद में एक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भंडाफोड़ किया था कि इस सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि 1989 में राजीव गांधी की कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव हार गई थी।
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