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Article 370: अमित शाह ने धारा-370 हटाने से पहले जून 2019 में किया था श्रीनगर दौरा, रिटायर्ड जनरल का दावा

Sun, 12 Feb 2023 06:34 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ढिल्लों द्वारा लिखित 'कितने गाजी आए कितने गाजी गए' केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उन 40 जवानों के सम्मान रिलीज होगी, जो दक्षिण कश्मीर के लेथफोरा में 14 फरवरी को आत्मघाती कार बम धमाके में शहीद हो गए थे। 
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Lt General (retired) K J S Dhillon - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने अपनी किताब में दावा किया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 26 जून 2019 को इसलिए श्रीनगर की यात्रा की थी, ताकि अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के सरकार के संकल्प को अंतिम रूप दिया जा सके। 

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ढिल्लों द्वारा लिखित 'कितने गाजी आए कितने गाजी गए' केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उन 40 जवानों के सम्मान रिलीज होगी, जो दक्षिण कश्मीर के लेथफोरा में 14 फरवरी को आत्मघाती कार बम धमाके में शहीद हो गए थे। 

उन्होंने अपनी किताब में कहा है कि 26 जून, 2019 को अमित शाह की यात्रा को पहले से ही एक नाटकीय घोषणा का अग्रदूत माना जा रहा था और मुझे सुबह 2 बजे एक फोन आया, जिसमें मुझे सुबह 7 बजे उनके साथ बैठक की सूचना दी गई थी।
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गृहमंत्री के साथ बैठक के बारे में ज्यादा जानकारी दिए बिना सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने लिखा कि हमारी एकांत मुलाकात के दौरान स्वादिष्ट भोजन, जिसमें आलू पराठा और प्रसिद्ध गुजराती व्यंजन ढोकला शामिल थे, के अलावा कई संवेदनशील मुद्दे और प्रमुख बिंदु चर्चा के लिए मेज पर थे।

सेना की श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के प्रमुख रहे ढिल्लों ने आगे कहा, इस चर्चा में पथ प्रवर्तक घोषणा (Path Breaking Declaration) पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को समझना शामिल था, जिसका अब पालन होना निश्चित था। मैं पूरी तरह से निष्पक्षता और पेशेवर इनपुट के साथ यह बताना चाहता हूं कि गृह मंत्री एजेंडे से पूरी तरह से वाकिफ थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से व्यापक शोध और होमवर्क किया था।

ढिल्लों ने किताब में कहा, बैठक के समापन पर मुझसे मेरे स्पष्ट और निजी विचार के बारे में पूछा गया और मेरी तत्काल प्रतिक्रिया थी कि अगर इतिहास लिखना है, तो किसी को इतिहास बनाना पड़ेगा। सरकार द्वारा पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने की घोषणा से पहले श्रीनगर में यह आखिरी बैठक थी।

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि अधिकारियों को सीमा पार से फैलाए जा रहे झूठ को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करना पड़ा, इसके अलावा यह सुनिश्चित करना पड़ा कि जान-माल का कोई नुकसान न हो।  उन्होंने अपनी किताब में लिखा, इसके अंत में मैं पूरे गर्व के साथ यह कहूंगा कि उद्देश्य हासिल हो गया है। ढिल्लों कश्मीर में स्थानीय सेना कमान का नेतृत्व कर रहे थे, जब यह निर्णय लिया गया था।

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