केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को असम के छात्र संगठनों और नागरिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) पर चर्चा की। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार प्रभावशाली ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन समेत इन संगठनों ने गृहमंत्री के सामने इस विधेयक पर अपनी बात रखी और उन्हें बताया कि कैसे प्रस्तावित कानून पूर्वोत्तर क्षेत्र के मूल लोगों पर असर डाल सकता है।
इस विधेयक में धार्मिक अत्याचार के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों एवं ईसाइयों को उपयुक्त दस्तावेज नहीं रहने पर भी भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए नागरिकता अधिनियम,1955 में संशोधन का प्रस्ताव है।
कैब पर परामर्श प्रक्रिया गृहमंत्री द्वारा शुक्रवार और शनिवार को शुरू की गयी थी और मंगलवार की बैठक इस मुद्दे पर ऐसी तीसरी बैठक है।
शाह ने कैब के खिलाफ पूर्वोत्तर में जबर्दस्त विरोध के चलते ये बैठकें बुलाई हैं।
बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के लोगों और कुछ संगठनों ने यह कहते हुए इस विधेयक का विरोध किया है कि यह 1985 की असम संधि के प्रावधानों को निष्प्रभावी बना देगा जिसमें उन सभी घुसपैठियों को बाहर निकालने की बात कही गई है जो 24 मार्च, 1971 के बाद आए, भले ही उनका धर्म कुछ भी क्यों न हो।
असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के बाद कहा कि हमारी बातचीत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई शंकाओं को दूर कर लिया गया है और कुछ समस्याओं पर अभी बातचीत जारी है।
उन्होंने आगे कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक जल्द ही सकारात्मक माहौल में संसद में आएगा और जल्द ही शेष समस्याओं का भी समाधान कर लिया जाएगा।