लोकसभा चुनाव के मिशन 2019 के लिए राज्यों के कील कांटे दुरुस्त करने में जुटे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की निगाहें अब हरियाणा पर है। राज्य में सरकार और संगठन की सुस्त चाल से शाह नाराज हैं और इस महीने के अंत तक आमूल चूल बदलाव करने जा रहे हैं। रविवार को राज्य के सीएम मनोहर लाल खट्टर और शाह के बीच इस मामले में विस्तृत मंथन हो चुका है। माना जा रहा है कि सुधार की गाज सूबे के पार्टी अध्यक्ष सुभाष बराला और खट्टर मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों पर गिरेगी।
दरअसल शाह के व्यक्तिगत स्तर पर कराए आकलन में मध्यप्रदेश, राजस्थान के संगठन और हरियाणा की सरकार व संगठन, दोनों में व्यापक बदलाव की जरूरत महसूस की गई है। पंजाब में पहले ही विजय सांपला की जगह संगठन की कमान श्वेत मलिक को दी जा चुकी है। त्रिपुरा, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों का आकलन फिलहाल जारी है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि हरियाणा में शाह की जींद रैली के उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के अलावा वहां फिर से जाट आरक्षण आंदोलन की संभावना ने नेतृत्व को चिंतित कर दिया है। जाट मसला उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को भी सीधा प्रभावित करता है। इसी कारण संगठन में सुधार को लेकर हुई कई दौर की बैठकों के बाद कई मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन में भेजने और प्रदेश अध्यक्ष को हटाने पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि अप्रैल अंत तक संभावित इस बदलाव को मई में कर्नाटक चुनाव के परिणाम तक टाला भी जा सकता है।