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मिशन 2019: अमित शाह ने रखा 350+ का टारगेट, बनाया ये चुनावी प्लान

Thu, 17 Aug 2017 09:39 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मिशन 2019 के लिए 350+ लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पार्टी का जोर विशेषतौर पर उन 120 सीटों पर रहेगा जहां अब तक उसकी कभी जीत नहीं हुई है।
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अपने रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए शाह ने गुरूवार को पार्टी मुख्यालय पर अपनी टीम के प्रमुख नेताओं और सरकार के करीब पौना दर्जन मंत्रियों को बुलाकर अहम बैठक की। 

खास बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण बैठक में यूपी और असम सरकार के मंत्री भी शामिल थे। यूपी से महेंद्र सिंह और स्वतंत्रदेव सिंह ने बैठक में शिरकत की। तो असम से हेमंत विश्वशर्मा बैठक में शामिल रहे।
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सूत्र बताते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के प्रति आश्वस्त शाह ने बैठक में पार्टी नेताओं से लोकसभा की 350 से ज्यादा सीटें जीतने की रणनीति पर अमल करने को कहा है। 

जीत न मिलने वाली 120 सीटों पर रहेगी विशेष नजर 
पत्थर पर घास उगाने के बाजीगर बन चूके अमित शाह ने मिशन 2019 के लिए 350+ सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए लोकसभा की उन 120 सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रीत करने का रणनीति बनाई है।

जहां भाजपा की उपस्थिति अब तक नहीं रही है। ये सीटें अधिकांशत: उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत की हैं।

इन 120 सीटों पर अभी से हर सीट का एक प्रभारी बनाया जाएगा। जो कि उस सीट से बाहर का नेता होगा। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को इन सीटों का पालक अधिकारी बनाया जा रहा है। 

एक नेता के जिम्मे करीब आधा दर्जन सीटें रहेंगी। इन नेताओं के काम की निगरानी का जिम्मा महामंत्री और संगठन मंत्रियों को दिया जा रहा है।

दरअसल भाजपा रणनीतिकारों को भी इस बात का अहसास है कि लोकसभा चुनाव 2014 में जिन इलाकों में जीत दर्ज कर पार्टी 282 सीटों तक पहुंची है। उन इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन चरम पर रहा है। इनमें थोडा बहुत नुकसान ही होने की संभावना है बढ़त की नहीं।

ऐसे में शाह ने उन सीटों पर खास ध्यान केंद्रीत करने की रणनीति बनाई है। जहां पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनाव में दूसरे, तीसरे स्थान पर था।

इसमें ऐसी भी सीटे हैं जहां भाजपा अब तक अपना खाता नहीं खोल पाई है। ऐसी सीटों की संख्या बढ़कर 150 के करीब पहुंचती हैं। लेकिन इनमें सबसे खराब स्थिति 120 सीटों पर हैं जहां पार्टी अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाई है।

यूपी,उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, गुजरात, हरियाणा और असम ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा चरम पर है। 

मोदी की सफल योजनाओं के जरिए राजनीतिक गणीत साधेगी भाजपा 

- फोटो : self
पार्टी ने तय किया है कि वह पीएम मोदी की सफल योजनाओं का पूरा राजनीतिक लाभ लेगी। उज्जवला योजना, मुद्रा बैंक और स्वच्छ भारत अभियान का उसे जमीन पर असर होता दिख रहा है।

आने वाले दिनों में सरकार की अन्य योजनाओं के लाभ भी बूथ स्तर पर जनता के बीच ले जाया जाएगा। वैसे करीब डेढ़ वर्ष पहले लोकसभा चुनाव की तैयारी कर पार्टी ने विपक्ष को चारों खाते चित्त करने का खाका तैयार कर लिया है।

बैठक में शामिल एक नेता के अनुसार अमित शाह लोकसभा चुनाव 2019 की ऐतिहासिक जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। उक्त नेता के अनुसार कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव में बेशक पार्टी की स्थिति थोड़ी कमजोर पड़े लेकिन लोकसभा में भाजपा की दोबारा से ऐतिहासिक जीत निश्चित है। 

बूथ पर केंद्रीत है रणनीति  
यूपी और उत्तराखंड की ऐतिहासिक सफलता का अनुभव देखते हुए अमित शाह ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपनी रणनीति का केंद्र बूथ को रखा है। यही वजह है कि अपने प्रवासों के दौरान भी वे बूथ पर जोर दे रहे हैं।

पढ़ें- विपक्ष में पड़ी दरार के बीच 2019 लोकसभा चुनावों के लिए AAP कर रही तैयारी

बूथ जीतो चुनाव जीतो की रणनीति पर अमल करने के लिए उन्होंने अपने नेताओं को निर्देश दिए हैं। दिन दयाल जन्मशदी वर्ष के तहत पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की योजना के रूप में करीब 4000 कार्यकर्ताओं ने अपना 1 साल का पूरा समय संगठन के लिए देने का निर्णय लिया है। सूत्र बताते हैं कि इन नेताओं की जिम्मेदारी लोकसभा चुनाव तक जारी रखी जाएगी।

इसी श्रेणी में 15 दिन का पूर्ण समय देने के लिए करीब 4 लाख 50 हजार कार्यकर्ताओं ने अपनी इच्छा जताई है। पार्टी की रणनीति इन पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को विशेषतौर पर उन क्षेत्रों में भेजने की है जहां पर भाजपा की स्थिति पहले के चुनावों में बेहद कमजोर रही है। ये पूर्णकालिक विशेष रूप से बूथ समिति बनाने और उनकी वास्तकिव स्थिति का जायजा लेने का कार्य करेंगे।
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विधानसभा चुनाव वाले राज्यों की भी ली शाह ने थाह 

बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की रणनीति के लिए हुई मैराथन बैठक में शाह ने उन राज्यों में भी भाजपा के चुनाव रणनीति और संगठन के क्षमता की थाह ली है। जहां आगामी महीनों में विधानसभा के चुनाव होने हैं।

हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और त्रिपुरा की संगठनात्मक स्थिति पर विशेष चर्चा हुई है। यही वजह है कि शाह ने इस अहम बैठक में यूपी के मंत्री महेंद्र सिंह और असम के हेमंत विश्व शर्मा को विशेषतौर पर बुलाया था।

पढ़ें- लोकसभा चुनाव 2019 तक बेफिक्र रहे आम जनता, अब कोई 'भी' कड़ा कदम नहीं उठाएगी मोदी सरकार!    

शर्मा पूर्वोत्तर में भाजपा की रणनीति के अहम अंग हैं। तो महेंद्र सिंह असम में भाजपा के प्रभारी रहे हैं। वहीं स्वतंत्र देव सिंह को बैठक में बुलाने का संकेत स्पष्ट है कि सिंह अब भी यूपी के लिए शाह की रणनीति के तुरूप का इक्का हैं। 

ये नेता भी हुए बैठक में शामिल 
लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी के लिए भाजपा मुख्यालय पर संपन्न हुई बैठक में शाह के अलावा पार्टी के सभी राष्ट्रीय महासचिव, संगठन महामंत्री रामलाल, सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, बीएस संतोष, वी सतीश और सौदान शामिल थे। सरकार के मंत्रियों के रूप में रवि शंकर प्रसाद, धमेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, निर्मला सितारमन, जेपी नड्डा, मनोज सिन्हा सरीखे नेता उपस्थित थे। 
 
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