केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सनातन धर्म और उसकी परंपराओं को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। गुजरात के गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करती है, वह देश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकती। उनके इस बयान को आने वाले राजनीतिक हालात और सांस्कृतिक विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है।
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संस्कृति और परंपराओं के लिए क्या कदम उठाए गए?
शिक्षापत्री की अहमियत क्या है?
अमित शाह ने भगवान स्वामीनारायण को ब्रिटिश काल में समाज को दिशा देने वाला महापुरुष बताया। उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण ने पैदल यात्रा कर समाज सुधार का कार्य किया। शिक्षापत्री को उन्होंने जीवन का नैतिक संविधान बताया, जो पारदर्शिता, अहिंसा, करुणा और कर्तव्यबोध सिखाता है। उन्होंने कहा कि कन्या शिक्षा, जातिवाद और छुआछूत के विरोध जैसे सुधार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
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