शाह ने कहा कि यह कानून देश की इस एजेंसी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ताकत देगा। यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए। लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एजेंसी को ऐसा अधिकार प्रदान करेगा।
इस विधेयक के उद्देश्यों व कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा 1 की उपधारा 2 में नया खंड ऐसे व्यक्तियों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिये है जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरुद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला कोई अनुसूचित अपराध करते हैं।
अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों को वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही है।
इसमें भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में एजेंसी को मामले का पंजीकरण और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के मकसद से एक या अधिक सत्र अदालत, या विशेष अदालत स्थापित करें।
मनीष तिवारी (फाइल फोटो)
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सरकार ने सोमवार को कहा कि एनआईए की जांच करने की शक्ति का विस्तार करना आतंकवाद के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की उसकी नीति का हिस्सा है और यह राष्ट्रहित में है।
वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए, आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है। निचले सदन में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि जांच एजेंसियों का 'राजनीतिक बदले' के लिए दुरुपयोग किया जाता है।
उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया में विषयों को लीक किए जाने के विषय को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता है तब तक वह निर्दोष होता है। उन्होंने जांच और अभियोजन दोनों विषयों में फर्क किए जाने का भी उल्लेख किया।
तिवारी ने यह भी दावा किया कि एनआईए अधिनियम की संवैधानिक वैधता के विषय का अभी तक निपटारा नहीं किया गया है क्योंकि इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी अदालतों में लंबित है। उन्होंने कहा कि एनआईए कानून को कुछ विशेष विषयों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था।
अब इस विशेष कानून को अन्य कानून की तरह नहीं बनाएं। एनआईए जैसी जांच एजेंसी को किसी अन्य पुलिस एजेंसी की तरह नहीं बनाएं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है।