फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी सरकार में एनआईए कानून का इस्तेमाल आतंकवाद के खात्मे के लिए होगा: अमित शाह

Mon, 15 Jul 2019 09:11 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
गृहमंत्री अमित शाह (फाइल) - फोटो : PTI
विज्ञापन

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कानून का दुरुपयोग करने की न तो कोई इच्छा है और न ही कोई मंशा है और इस कानून का शुद्ध रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिए ही इस्तेमाल किया जायेगा। 

विज्ञापन




लोकसभा में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए अमित शाह ने कहा कि कुछ लोगों ने धर्म का जिक्र किया और एनआईए कानून का दुरूपयोग किए जाने के मुद्दे को भी उठाया। शाह ने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि मोदी सरकार की एनआईए कानून का दुरूपयोग करने की न तो कोई इच्छा है और न ही कोई मंशा है और इस कानून का शुद्ध रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिय उपयोग किया जायेगा।

कुछ सदस्यों द्वारा आतंकवादी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (पोटा) का जिक्र किए जाने के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि पोटा कानून को वोटबैंक बचाने के लिए भंग किया गया था। पोटा की मदद से देश को आतंकवाद से बचाया जाता था, इससे आतंकवादियों के अंदर भय पैदा हो गया था और देश की सीमाओं की रक्षा होती थी। इस कानून को पूर्ववर्ती संप्रग की सरकार ने साल 2004 में आते ही भंग कर दिया। 
विज्ञापन


शाह ने कहा कि पोटा को भंग करना उचित नहीं था, यह हमारा आज भी मानना है। पूर्व के सुरक्षा बलों के अधिकारियों का भी यही मानना रहा है। पोटा को भंग किए जाने के बाद आतंकवाद इतना बढ़ा कि स्थिति काबू में नहीं रही और संप्रग सरकार को ही एनआईए को लाने का फैसला करना पड़ा। 

उन्होंने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि मोदी सरकार की एनआईए कानून का दुरुपयोग करने की न तो कोई इच्छा है और न ही कोई मंशा है और इस कानून का शुद्ध रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिय उपयोग किया जाएगा। कुछ सदस्यों द्वारा ‘पोटा’ (आतंकवादी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) का जिक्र किए जाने के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि पोटा कानून को वोटबैंक बचाने के लिए भंग (निरस्त) किया गया था। पोटा की मदद से देश को आतंकवाद से बचाया जाता था। इससे आतंकवादियों के अंदर भय था, देश की सीमाओं की रक्षा होती थी। इस कानून को पूर्ववर्ती संप्रग की सरकार ने 2004 में आते ही भंग कर दिया। उन्होंने कहा कि पोटा को भंग करना उचित नहीं था, यह हमारा आज भी मानना है  पूर्व के सुरक्षा बलों के अधिकारियों का भी यही मानना रहा है।

गृह मंत्री ने इस संदर्भ में मुंबई में सीरियल बम विस्फोट और 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले का भी उदाहरण दिया। शाह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने वाली किसी एजेंसी को और ताकत देने की बात हो और सदन एक मत न हो, तो इससे आतंकवाद फैलाने वालों का मनोबल बढ़ता है। शाह ने कहा कि वे सभी दलों के लोगों से कहना चाहता हैं कि यह कानून देश में आतंकवाद से निपटने में सुरक्षा एजेंसी को ताकत देगा। 

यह संशोधन एजेंसी को यह अधिकार देगा

एनआईए (फाइल)
शाह ने कहा कि यह कानून देश की इस एजेंसी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ताकत देगा। यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए। लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एजेंसी को ऐसा अधिकार प्रदान करेगा। 

इस विधेयक के उद्देश्यों व कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा 1 की उपधारा 2 में नया खंड ऐसे व्यक्तियों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिये है जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरुद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला कोई अनुसूचित अपराध करते हैं। 

अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों को वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही है।

इसमें भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में एजेंसी को मामले का पंजीकरण और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के मकसद से एक या अधिक सत्र अदालत, या विशेष अदालत स्थापित करें। 
विज्ञापन

सरकार ने इसे राष्ट्रहित माना, तो कांग्रेस ने पुलिस स्टेट में बदलने की साजिश बताया

मनीष तिवारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सरकार ने सोमवार को कहा कि एनआईए की जांच करने की शक्ति का विस्तार करना आतंकवाद के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की उसकी नीति का हिस्सा है और यह राष्ट्रहित में है।

वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए, आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है। निचले सदन में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि जांच एजेंसियों का 'राजनीतिक बदले' के लिए दुरुपयोग किया जाता है। 

उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया में विषयों को लीक किए जाने के विषय को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता है तब तक वह निर्दोष होता है। उन्होंने जांच और अभियोजन दोनों विषयों में फर्क किए जाने का भी उल्लेख किया।

तिवारी ने यह भी दावा किया कि एनआईए अधिनियम की संवैधानिक वैधता के विषय का अभी तक निपटारा नहीं किया गया है क्योंकि इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी अदालतों में लंबित है। उन्होंने कहा कि एनआईए कानून को कुछ विशेष विषयों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था।

अब इस विशेष कानून को अन्य कानून की तरह नहीं बनाएं। एनआईए जैसी जांच एजेंसी को किसी अन्य पुलिस एजेंसी की तरह नहीं बनाएं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें