केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से राज्य में अपराधियों को सजा की दर में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। यहां लावड गांव में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के पहले दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि मोदी के मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले राज्य की पुलिस व्यवस्था लगभग अंग्रेजों के जमाने की थी। लोग इसे केवल रोजगार के साधन के रूप में देखते थे। मोदी ने इसके लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने पुलिस के आधुनिकीकरण का फैसला लिया। थानों का कंप्यूटराइजेशन किया और सुरक्षा के साथ कानून-व्यवस्था संबंधी विश्वविद्यालयों पर जोर दिया। उनके प्रयासों से वर्ष 2012 में राज्य में सजा की दर बढ़कर 22 फीसदी हो गई।
उन्होंने बताया कि मोदी के कार्यकाल में पुलिस के आधुनिकीकरण के तहत सभी थानों को कंप्यूटर दिए गए और उन्हें इंटरनेट से जोड़ा गया। इसके लिए एक निजी फर्म को सॉफ्टवेयर बनाने का जिम्मा सौंपा गया, जो अब भी बिना किसी बाधा के काम कर रहा है। तकनीक की समझ रखने वाले कांस्टेबिलों को सॉफ्टवेयर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई, जो देश में कानून की पढ़ाई के लिए श्रेष्ठ है। इसी क्रम में आरआरयू और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। इसके पीछे मकसद देश के युवाओं को कानून-व्यवस्था की इन तीनों विधाओं में प्रशिक्षित करने का था।
आरआरयू के कैंपस देशभर में खोलने का आह्वान
गृहमंत्री ने इस दौरान कहा कि आरआरयू को देश के विभिन्न इलाकों में अपने कैंपस खोलकर युवाओं को प्रशिक्षित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दिशा में जल्द ही कदम उठाया जाएगा।