केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम संस्था (बीएपीएस) स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज ने भक्ति और सेवा को जोड़ा, मनुष्य में ईश्वर के दर्शन के वैदिक सिद्धांत को साकार किया।
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था की ओर से आयोजित प्रमुख वर्णी अमृत महोत्सव में अपने संबोधन में शाह ने कहा प्रमुख स्वामी महाराज ने अध्यात्म एवं वैष्णव दर्शन को व्यापक एवं व्यावहारिक बनाया। उन्होंने मानव समाज को आस्था और ईश्वर-भक्ति से जोड़ने का कार्य किया। कर्म और करुणा के माध्यम से, प्रमुख स्वामी महाराज ने दूसरों के जीवन को उन्नत करने की प्राचीन ऋषि संस्कृति को पुनर्जीवित किया। इसके साथ ही, उन्होंने संपूर्ण सनातन धर्म के लिए एक महान कार्य किया। उन्होंने बिना कोई विशिष्ट शिक्षा दिए, सनातन धर्म के विभिन्न संप्रदायों में संतत्व का सार स्थापित किया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन यहां साबरमती रिवरफ्रंट पर 2025 में प्रमुख स्वामी महाराज की बीएपीएस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया है। शाह के अलावा, बीएपीएस प्रमुख महंत स्वामी महाराज और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अन्य लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
सनातन मूल्यों के संरक्षण में उनका योगदान अतुलनीय
अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सनातन धर्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती सांन्यास परंपरा और मठ व्यवस्था के प्रति घटता विश्वास था। उन्होंने कहा प्रमुख स्वामी महाराज और बीएपीएस के हजारों संतों ने अपने आचरण से इस परंपरा के प्रति सम्मान को फिर से स्थापित किया।
उन्होंने दिखाया कि एक सच्चे संत का जीवन कैसा होना चाहिए और कैसे ज्ञान का अमृत सरलता से समाज में बांटा जा सकता है। शाह ने यह भी कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सनातन मूल्यों के संरक्षण को समर्पित कर दिया।
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