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अमित शाह ने रामनाथ कोविंद के नाम पर आखिरी तक बनाए रखी थी पार्टी में चुप्पी

Sat, 24 Jun 2017 07:34 PM IST
amarujala.com- Presented by: अरविंद कुमार
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राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : Intoday
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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आखिर तक एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को लेकर चुप्पी बनाए रखी। जबकि राष्ट्रपति की रेस में रामनाथ कोविंद का नाम दूर-दूर तक सुनने में नहीं था। वहीं, इस रेस से बीजेपी ने आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत, एल के आडवाणी, थावरचंद गहलोत जैसी जानी-मानी राजनीतिक शख्सियत को दरकिनार कर विपक्ष को कड़ी चुनौती दे डाली। 
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बता दें कि 26 जुलाई को देश को एक नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। जबकि पिछले दो महीने से देशभर में नये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम को लेकर हलचल सी मची हुई थी। वहीं, एनडीए ने 22 जून को शाम 4.30 बजे संसद लाइब्रेरी में रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर नाम साफ करके विपक्ष को करारा झटका दिया।

लेकिन, इसी नाम के साथ देशभर में ये लहर दौड़ गई कि आखिर रामनाथ कोविंद कौन है। यहां तक कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी इस नाम को नहीं जानती थीं। वहीं, रामनाथ कोविंद का नाम घोषित होने से सोशल मीडिया पर उन्हें जानने की लहर सी दौड़ उठी। इतना ही नहीं, बीजेपी के मंत्री भी लगातार ट्ववीट कर रहे थे जिनमें उन्होंने रामनाथ को एक 'परफेक्ट जेंटलमेन' बताया था। 
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इसके बाद पीएम मोदी ने भी रामनाथ कोविंद के बचाव में लेकर अपनी राय रखी और कहा कि रामनाथ एक किसान के बेटे हैं, जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। उन्होंने अब तक की पूरी जिंदगी गरीब लोगों की सहायता और समाज सेवा करने में लगा दी है। उन्होंने आगे कहा कि रामनाथ एक बेहद पढ़े-लिखे इंसान होने के साथ-साथ भारतीय संविधान की अच्छी समझ रखने वाले व्यक्ति भी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि रामनाथ कोविंद ही देश के अच्छे राष्ट्रपति बनेंगे।
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ramnath kovind
वहीं, भाजपा के अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, जून के पहले हफ्ते में ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद को लेकर राय बना ली थी लेकिन उन्होंने इस बात पर अंत तक चुप्पी साधे रखी। यहां तक कि बीजेपी के अंदरखाने में भी इस बात की किसी को खबर न थी। उधर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर चुने जाने की भी कोई उम्मीद नहीं थी। बता दें कि बीजेपी में थावरचंद गहलोत को ही इस रेस में बड़ा नाम माना जा रहा था। 

बता दें कि रामनाथ कोविंद 2014 के आम चुनाव के दौरान अमित शाह की नजर में आए और वहीं, बीजेपी को भी दलित समाज से एक ऐसे साफ उम्मीदवार की जरूरत थी। क्योंकि वे बीजेपी के दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं और उन्होंने बीजेपी के यूपी में महासचिव के पद को बिना किसी डर के स्वीकार भी किया था। वहीं, 2014 के आम चुनाव के दौरान रामनाथ कोविंद ने अमित शाह के दलित समाज की चुनौतियों से निपटने के आदेश को भी माना। 

बीजेपी सदस्य ने बताया कि अगर याद हो तो 2015 में बिहार के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद का नाम लिया था। पीएम ने कहा था कि रामनाथ ने समाज के पिछड़े और अति पिछड़े दलितों के लिए कल्याणकारी काम किए हैं और इसी को देखते हुए 18 अगस्त 2015 में रामनाथ को बिहार का राज्यपाल बनाया।

रामनाथ की इसी लगन को देखते हुए आज दो साल बाद उन्हें देश के सबसे सर्वोच्च पद के लिए खड़ा किया गया है। इतना ही नहीं, रामनाथ के आरएसएस में योगदान, संविधान की पूरी जानकारी और इंग्लिश भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ ने पीएम मोदी को आकर्षित किया है जिसके चलते उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए योग्य माना गया है.   
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