केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भरोसा जताया है कि जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द रिहा किया जाएगा। शाह ने रविवार को ‘जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी’ के शिष्टमंडल से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने और हिरासत में रखे गए नेताओं की जल्द रिहाई का आश्वासन दिया।
शाह ने कहा, अगले कुछ महीनों में जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई देगा। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास को सभी कदम उठाएगी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री के समक्ष 40 मुद्दे उठाए, जिस पर उन्होंने कहा कि सरकार का केंद्र शासित प्रदेश क्षेत्र में जनसांख्यिकी बदलाव का इरादा नहीं है। इस तरह की बातों का कोई आधार नहीं है।
गृह मंत्री ने घाटी में पाबंदियों पर प्रतिनिधिमंडल की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि पाबंदियों पर छूट के संबंध में सभी फैसले जमीनी हकीकत के आधार पर लिए गए हैं न कि किसी दबाव में। आने वाले समय में हिरासत में रखे गए लोगों को भी रिहा किया जाएगा क्योंकि सरकार नहीं चाहती कि किसी भी व्यक्ति की जान जाए। चाहे वह आम कश्मीरी हो या सुरक्षाकर्मी।
पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और गृहमंत्री के बीच यह बैठक लगभग दो घंटे चली। बैठक के बाद बुखारी ने कहा कि गृहमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनसांख्यिकी में बदलाव का सवाल ही पैदा नहीं होता। सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने को प्रतिबद्ध है। साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
तीन गुना आएगा निवेश
गृह मंत्री ने जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय कानूनों के कार्यान्वयन में कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सरकार सभी समुदायों व वर्गों के हितों का ध्यान रख रही है। सरकार शीघ्र आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए एक औद्योगिक नीति लेकर आएगी। शाह ने उम्मीद जताई कि अगले चार वर्षों में जम्मू कश्मीर में पिछले 70 वर्षों में मिले 13,000 करोड़ रुपये से तीन गुना अधिक निवेश आएगा।