भाजपा का केंद्रीय मुख्यालय दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित नवनिर्मित आलीशान इमारत में पिछले साल स्थानांतरित हो गया था लेकिन यह पार्टी को रास नहीं आ रहा है। केंद्रीय कार्यालय के नई इमारत में आने बाद देशभर में हुए एक के बाद एक चुनाव पार्टी हारती गई है। पार्टी को लग रहा है कि इमारत में वास्तु दोष है। इसे देखते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अशोक मार्ग स्थित पार्टी के पुराने मुख्यालय में बैठने का फैसला लिया है। वहां उनके कार्यालय को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इस मुख्यालय से काम कर पार्टी ने 2014 लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और शाह का इस जीत में अहम योगदान था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के नए मुख्यालय का उद्घाटन पिछले वर्ष 18 फरवरी को किया था। इसी दिन त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आए थे। भाजपा ने सहयोगी दल आईपीएफटी के साथ मिलकर 60 सदस्यीय विधानसभा में 44 सीटें जीती थीं। उसने 25 साल से वहां सत्ता में काबिज वाम मोर्चे को हराया था। पूरी इमारत रोशनी से जगमगा रही थी और ढोल-नगाड़ों की ताल पर कार्यकर्ता नाच रहे थे। यही पार्टी के लिए आखिरी खुशी का मौका था।
मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी भाजपा सरकार नहीं बना पाई। यही हालत मध्य प्रदेश में हुई। छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु हो गई और उनकी शवयात्रा भी नए कार्यालय से ही निकाली गई।
पार्टी का कहना है वॉर रूम पुराने मुख्यालय में, इसलिए शाह यहीं बैठेंगे
हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना वॉर रूम अशोक रोड स्थित मुख्यालय में बनाया है, इसलिए उसकी सतत निगरानी के लिए अमित शाह अब ज्यादा समय यहीं बैठेंगे। कुछ बैठकों के लिए वह नए कार्यालय भी जाएंगे लेकिन उनका ज्यादा समय अब अशोक रोड पर ही बीतेगा।
पहले भी ठीक कराया वास्तु दोष
शाह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के पुराने मुख्यालय में वास्तु दोष ठीक कराने के लिए उसमें प्रवेश के लिए एक नया गेट बनवाया था। इसके अलावा भी उन्होंने इसमें कई बदलाव कराए थे।
कांग्रेस भी वास्तु दोष के कारण नए कार्यालय में नहीं हुई थी शिफ्ट
कांग्रेस ने भी राजीव गांधी के कार्यकाल में डा. राजेंद्र प्रसाद रोड पर भव्य पार्टी कार्यालय बनवाया था। इसका नाम जवाहर भवन रखा गया था। इससे पहले कि पार्टी नए कार्यालय में जाती राजीव की हत्या कर दी गई। इसके बाद कांग्रेस नए कार्यालय में शिफ्ट नहीं हुई। इस इमारत में अब राजीव गांधी फाउंडेशन का दफ्तर है।
ये बंगले भी शुभ-अशुभ
मौलाना आजाद रोड स्थित एक सरकारी बंगले को कोई लेना नहीं चाहता क्योंकि इसमें रहने वाला मंत्री ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रह पाता है। जबकि 13, तालकटोरा रोड स्थित बंगला सभी की पसंद है। इसमें रहते हुए प्रणब मुखर्जी हमेशा बड़े पदों पर रहे और अंत में राष्ट्रपति बने। उनके बाद इस बंगले में रहने आए अशोक गहलोत कांग्रेस के संगठन महामंत्री रहे और फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री बने।