आपातकाल को लेकर अपने ट्वीट पर शाह ने कहा, 'इंदिरा जी के बाद, क्या गांधी परिवार के बाहर कोई कांग्रेस अध्यक्ष रहा है? वे किस लोकतंत्र की बात करते हैं? मैं कोविड के दौरान कोई राजनीति नहीं करना चाहता। आप पिछले 10 वर्षों के मेरे ट्वीट को देखें। यहां तक की हर 25 जून को मैं बयान देता हूं। आपातकाल को लोगों द्वारा याद किया जाना चाहिए क्योंकि इसने हमारे लोकतंत्र की जड़ों पर हमला किया था। किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता या नागरिक को इसे नहीं भूलना चाहिए। इसके बारे में जागरूकता होनी चाहिए। यह किसी पार्टी के बारे में नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र पर हमले के बारे में है।'
दिल्ली में नहीं हुआ है कोरोना का सामुदायिक प्रसार: शाह
गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली में कोरोना वायरस का सामुदायिक प्रसार नहीं हुआ है। घबराने की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कोरोना के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ी। मैं राहुल गांधी को सलाह नहीं दे सकता, यह उनकी पार्टी के नेताओं का काम है। कुछ लोग वक्रदृष्टि होते हैं, वे सही चीजों में भी गलत देखते हैं। भारत ने कोरोना के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ी और हमारे आंकड़े दुनिया की तुलना में बहुत बेहतर हैं।
दिल्ली में कोविड-19 को लेकर लिए गए फैसलों पर हुए विवाद को लेकर गृह मंत्री ने कहा कि समन्वय रहा है, अरविंद केजरीवाल को हमेशा लूप में रखा जाता है। वह निर्णय लेने में भी शामिल हैं। कुछ राजनीतिक बयान दिए गए हैं, लेकिन इसका निर्णय लेने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मनीष सिसोदिया के बयान (जुलाई-अंत तक हो जाएंगे 5.5 लाख मामले) के बाद प्रधानमंत्री ने मुझसे, गृह मंत्रालय से, दिल्ली सरकार की मदद करने के लिए कहा। इसके तुरंत बाद, एक समन्वय बैठक बुलाई गई और कई निर्णय लिए गए, जिसमें सभी कंटेनमेंट जोन के सभी व्यक्तियों का परीक्षण शामिल था।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोविड-19 पीड़ितों के शवों को लेकर स्थिति गंभीर बन गई थी। 350 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार लंबित था। हमने तय किया कि दो दिनों के अंदर शवों का अंतिम संस्कार धर्म के अनुसार किया जाएगा। आज अंतिम संस्कार के लिए कोई शव नहीं बचा है। अब उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। अपने एलएनजेपी अस्पताल के दौरे को लेकर शाह ने कहा कि इसने स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल और नागरिकों के विश्वास को बढ़ाने में मदद की। मैं कई नर्सों से मिला जो काम कर रही हैं और मजबूती से लड़ रही हैं। मुझे कई मुद्दों का पता चला।
अमित शाह ने कहा कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ, प्रधानमंत्री और मैंने सभी मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें प्रवासियों के रहने और खाने की व्यवस्था करने के लिए कहा। लगभग 2.5 करोड़ लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से 11,000 करोड़ रुपये राज्यों को हस्तांतरित किए गए। यह सुनिश्चित किया गया था कि अस्पतालों और क्वारंटीन केंद्र राज्यों में संचालित हों। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने 'श्रमिक स्पेशल ट्रेन' सेवाओं को चलाने का फैसला किया और अब तक लगभग 63 लाख प्रवासियों ने 4594 ट्रेनों के जरिए यात्रा की है।
प्रवासियों के पलायन को लेकर गृह मंत्री ने कहा कि कुछ दुखद घटनाएं हुईं। जब लोगों ने धैर्य खो दिया और पैदल यात्रा शुरू की तो हमें भी इससे दुख हुआ। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा कि निकटतम रेलवे स्टेशनों तक पैदल यात्रा करने वाले प्रवासियों के लिए बसें चलाएं। अब तक, पूरे देश में एक करोड़ 20 लाख लोगों को ले जाया गया है।
30 जून तक उपलब्ध हो जाएंगे 30,000 बेड: शाह
शाह ने कहा कि 14 जून को दिल्ली में 9937 कोविड-19 बेड थे। 30 जून तक 30,000 बेड उपलब्ध हो जाएंगे। 8000 बेड कोच रेलवे कोच में उपलब्ध हैं, 8000 और अधिक जोड़े जा रहे हैं। डीआरडीओ 250 आईसीयू बेड के साथ एक समर्पित अस्पताल स्थापित करने वाला है। आईटीबीपी 10,000 बिस्तर वाला राधा स्वामी सत्संग कोविड-19 केंद्र संचालित करेगा।