पूर्व आईपीएस अधिकारी और जय भारत नेशनल पार्टी के संस्थापक वी.वी.लक्ष्मीनारायण ने कहा, यह आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग करने उपयुक्त मौका है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक तेलकापल्ली रवि ने कहा कि तेदेपा को भाजपा से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करनी चाहिए। साल 2014 के आम चुनाव में चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जून 2019 में कहा था कि केंद्र सरकार के पास आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा था कि ओडिशा , राजस्थान, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से अनुरोध प्राप्त हुए हैं। भाजपा बीते दस वर्षों में अपने वादे पर खरी नहीं उतरी और यहां तक कह गई कि विशेष राज्य का दर्जा एक बंद अध्याय था, जिसे एक विशेष पैकेज से बदल दिया गया था, जिसका चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री (2014-18) रहते स्वागत किया था।
निवर्तमान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने विशेष पैकेज स्वीकार करने के लिए नायडू की आलोचना की थी। बाद में तेदेपा ने यू-टर्न लिया और विशेष राज्य के दर्जे की मांग केंद्र के सामने रखी और फिर 2018 में राजग से संबंध तोड़ दिए थे। वरिष्ठ पत्रकार एस नागेश कुमार ने कहा कि तेदेपा को विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज की मांग करने के बजाय राजधानी अमरावती के निर्माण और पोलावरम परियोजना को पूरा करने के लिए पैसे की मांग ज्यादा फोकस करना चाहिए।