21 मार्च से पहले तक मांगे सुझाव
दो दिन पहले परिसीमन आयोग ने जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों की सीटवार परिसीमन व्यवस्था को ध्यान में रखते एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा में जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र को आवंटित की जाने वाली सीटों के लिए पांच क्षेत्रों की संख्या निर्धारित की है। लोकसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य क्षेत्र की पांचों सीटों में से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए फिलहाल कोई भी सीट आरक्षित नहीं की है। इसके अलावा आदेश की संख्या तीन के मुताबिक जम्मू एवं कश्मीर राज्य क्षेत्र की विधानसभा सीटों को 90 विधानसभा क्षेत्रों में विभाजन के परिसीमन का प्रस्ताव रखा है। इस परिसीमन प्रस्ताव के मुताबिक अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए क्रमशः सात और नौ सीटों का प्रस्ताव रखा है। परिसीमन आयोग के इस प्रस्तावित आदेश के मुताबिक इन प्रस्तावों के संबंध में अगर किसी को कोई आपत्ति और सुझाव देने हैं तो 21 मार्च से पहले दिए जा सकते हैं। ताकि उस पर विचार किया जा सके।
24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में
सूत्रों का कहना है परिसीमन को अमलीजामा पहनाने के बाद अनुमान यही लगाया जा रहा है कि 2022 के अंत तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव हो सकते हैं। चूंकि परिसीमन का काम अंतिम चरण में है और जिस तेजी से परिसीमन हो रहा है उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चुनाव बहुत जल्द हो जाएंगे। परिसीमन आयोग की टीम जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा सीटों का जायजा और उसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए इसी महीने की 28 और 29 मार्च को राज्य का दौरा भी करेगी। परिसीमन आयोग के मसौदे के तहत जम्मू-कश्मीर में 114 सीटों का जिक्र है, जिसमें 90 सीटों पर चुनाव कराने की कवायद है। बाकी 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हैं।
नेताओं ने बताया संयोग
कश्मीर में चुनाव कराए जाने से पहले की परिसीमन के अंतिम प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक जानकार अलग-अलग मत रख रहे हैं। लेकिन सबका मानना यही है कि जितनी जल्दी चुनाव होंगे उतना ही बेहतर हो सकेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्म का बनना और कश्मीर में चुनाव को लेकर परिसीमन आयोग के मसौदे का आपस में कोई लेना देना नहीं है। यह महज एक संयोग है कि जब परिसीमन अपने अंतिम चरण में है तो कश्मीरी पंडितों के पलायन बनी फिल्म भी रिलीज हो चुकी है। राजनीतिक चिंतन एके यादव कहते हैं कि चुनाव के दौरान निश्चित तौर पर कश्मीरी पंडितों और विस्थापितों के लिए किए जाने वाले प्रयासों का निश्चित तौर पर बड़ा असर होने वाला है। यादव कहते हैं जिस तरीके से जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कश्मीरी पंडितों को बसाए जाने के लिए बुनियादी शुरुआत की है उसका असर निश्चित तौर पर देखा जाएगा।