कर्नाटक में उगाई जाने वाली सुपारी को डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कैंसरकारी बताया गया। इसके बाद देशभर में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में किसानों में बढ़ती चिंता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आईसीएआर वैज्ञानिकों को अध्ययन कर तय समय में रिपोर्ट देने को कहा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सुपारी भारत की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी है।
कर्नाटक में उगाई जाने वाली सुपारी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस रिपोर्ट में सुपारी को कैंसरकारी (कार्सिनोजेनिक) बताया गया है, जिससे किसानों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया है कि वे इस पर अध्ययन करें और जल्द से जल्द यह स्पष्ट करें कि सुपारी वास्तव में कैंसरकारी है या नहीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन में सुपारी विकास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी, प्रह्लाद जोशी, राज्य मंत्री और सुपारी उत्पादक क्षेत्रों के सांसद शामिल हुए।
वैज्ञानिकों को रिपोर्ट देने के निर्देश
कर्नाटक में सुपारी का बड़ा उत्पादन
कर्नाटक में 6.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है। पूरे देश में लगभग 60 लाख लोग सुपारी की खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। देश में उत्पादित सुपारी का कुल बाजार मूल्य ₹58,664 करोड़ आंका गया है। वहीं वर्ष 2023-24 में भारत ने 10,637 टन सुपारी का निर्यात किया, जिससे ₹400 करोड़ का विदेशी मुद्रा अर्जन हुआ।