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क्यों अमेरिकी मैम का झुग्गी वाले छोरे पर आ गया दिल? कुछ अजब प्रेमकथाएं

Wed, 20 Apr 2016 04:28 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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अजब प्रेम कहानियां
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वो दोनों एक दूसरे की जुबानों से अंजान हैं लेकिन दिल की भाषा बखूबी जानते हैं। बात होठों तक आने से पहले ही समझ लेतें हैं। दोनों की उम्र, जन्म स्थान में भारी फासला है। लेकिन प्यार है कि अमेरिका से अहमदाबाद की दूरी कब सिमट गई पता नहीं चला। हमने रोमियो-जूलियट, लैला-मजनू, शिरीन-फरहाद की प्रेमकहानियां पढ़ी हैं। यकीनन, इनमें से अगर कोई आज की तारीख में होता तो अमेरिका की 41 वर्षीय एमिली और 23 साल के अहमदाबाद की झुग्गियों में रहने वाले देवेश चावडा की प्रेमकहानी से शायद ईर्ष्या कर जाता है। हालांकि जहां प्यार होता है वहां दूसरे जज्बात ठहरते नहीं हैं। 
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बीते हफ्ते भर से इस जोड़े की प्रेमकहानी ऑनलाइन सेंसेशन बनी हुई है। स्टोरी ट्रेंड भी कर रही है। उम्मीद है आपके दिल को भी छू जाएगी। एमिली और देवेश पहली दफा सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए। पहले दोस्ती हुई। फिर इश्क परवान चढ़ा और फिर शादी। इस गुजराती छोकरे के प्यार में एमिली इस कदर पागल हुईं कि अमेरिका छोड़कर झुग्गियों में रहने को तैयार हो गईं। एक आम भारतीय नारी की जिंदगी जीने की कसम खा रही है।

एमिली और देवेश की पूरी प्रेमकहानी से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं। इसके अलावा और भी ऐसी ही दिलकश प्रेम कहानियों को हमने संजाने की कोशिश की है। तो आइए आगे की स्लाइड में डूब जाते हैं प्यार की इन कहानियों में, महसूस करते हैं वो खुमारी जिसके लिए शब्द जुटाने मुश्किल हो जाते हैं...
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सब कुछ छोड़ झुग्गी वाले की हुईं मैमसाब!

एमिली और देवेश - फोटो : businessinsider.in
देवेश और एमिली की उम्र में तकरीबन 18 साल का अंतर है। लेकिन प्यार के नाम पर दोनों के दिलों की धड़कनें एक जैसी ही धड़कती हैं। दोनों के लिए इश्क और इबादत में कोई अंतर नहीं रह गया है। घरवालों और समाज की सोच, पुरानी परंपराएं, रीति-रिवाज सब के सब इस जोड़े की मोहब्बत पर कुर्बान हैं। दोनों शादी कर चुके हैं। शादी हिंदु रीति-रिवाजों से हुई।

शादी तक पहुंचने का रास्ता साल भर की उस खुमारी से तय हुआ जो इंटरनेट पर सोशल मीडिया के माध्यम सिर चढ़कर बोली। एमिली अमेरिका के मोंटाना में पेशे से हेल्थ को-ऑर्डिनेटर हैं। देवेश बेरोजगार हैं। झुग्गी में रहते हैं। दोनों सबसे पहले फेसबुक पर दोस्त बने। सबसे हैरान करने वाली बात इन दोनों की भाषाई असमर्थता है जो इन दोनों के रिश्ते के आड़े नहीं आई। देवेश को अंग्रेजी नहीं आती और एमिली को हिंदी। बावजूद इसके दोनों साल भर एक दूसरे से चैटिंग करते रहे। वीडियो कॉल पर बातें करते रहे। देवेश कहते हैं कि उन्होंने इस दौरान गूगल ट्रांसलेशन का इस्तेमाल किया। 

देवेश गूगल ट्रांसलेशन पर एमिली की कही बात को लिखकर अनुवाद करते फिर समझते। फिर हिंदी में कही अपनी बात को गूगल से अग्रेजी में अनुवाद कर एमिली को समझाते। आज भी दोनों एक दूसरे की भाषा में दक्ष नहीं हैं, फिर भी जिंदगी मजे से चल रही है। इससे एक बात तो तय है कि प्यार में दिल की जुबान बखूबी समझ आती है, बशर्ते प्यार में सच्चाई हो। किसी ने कहा भी है कि जहां प्यार है वहां भगवान है। और भगवान साथ हो तो दुनिया में दिक्कतें भी सोख फूलों की मानिंद हो जाती हैं।

सोशल मीडिया के जरिए 12 महीने के रोमांस के दौरान एमिली इतनी जज्बाती हुई कि देवेश से मुलाकात करने की ठान ली। बीते हफ्ते एमिली ने अहमदाबाद की फ्लाइट पकड़ी और उसी दिन देवेश से शादी कर ली जिस दिन पहली बार प्रत्यक्ष तौर पर मिलीं। 

देवेश की मानें तो उसके घरवाले इस शादी के पक्ष में नहीं थे। लेकिन कैसे भी उन्हें मना लिया।

एमिली और देवेश की मानें तो दोनों को एक-दूसरे के सादा तौर-तरीकों, रहन-सहन और भोलेपन ने प्रभावित किया। देवेश के प्रति एमिली की दीवानगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि एमिली ने भारतीय खाना बनाना भी सीख लिया। 

फिलहाल ये प्रेमी जोड़ा अमेरिका में एक महीने के हनीमून की प्लानिंग कर रहा है। लेकिन एमिली कहती हैं कि हनीमून के बाद वो भारत में ही देवेश और उसके माता-पिता के साथ झुग्गी में ही रहेंगी। आधुनिकता और भागम-भाग के जमाने में जहां भौतिकता की सहूलियतें ही पति-पत्नी के रिश्तों को बचाए रखने की एकमात्र कसौटी बनती जा रही हैं वहां एमिली और देवेश की प्रेमकहानी समर्पण और त्याग की अनोखी मिसाल है। इसकी तारीफ में शब्द भी कम पड़ जाते हैं।
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प्यार में तय किया कैलीफोर्निया से करनाल तक का रास्ता

एड्रियाना और मुकेश - फोटो : dailymail
हरियाणा के मुकेश कुमार और कैलीफोर्निया की एड्रियाना पेरल के प्यार की दास्तान भी कुछ ऐसी ही है। मुकेश और एड्रियाना भी इंटरनेट और मोबाइल फोन के जरिए एक दूसरे के संपर्क में आए। 2013 में जब दोनों परिणय सूत्र में बंधे तब मुकेश की उम्र 25 साल थी और एड्रियाना की 41 साल। यानी एड्रियाना मुकेश से 16 साल बड़ी थीं। 

मुकेश मूल रूप से हरियाणा के करनाल जिले के पोपरन गांव के रहने वाले हैं। एक दिन वह इंटरनेट पर सर्फिंग कर रहे थे। तभी फेसबुक पर एक विदेशी चेहरे ने उनका ध्यान खींचा। मुकेश ने एड्रियाना को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। करीब नौ दिनों तक चैटिंग चलती रही। इस दौरान मुकेश का दिल विदेशी मैम के लिए धड़कने लगा। मुकेश के दिल में प्यार की कसक इस कदर उठने लगी कि विदेशी मैम की आवाज सुनने को बेकरार हो गए। आखिर मुकेश ने एड्रियाना से फोन नंबर मांगा और दसवें दिन नंबर डायल कर 'आई लव यू' बोल दिया। 

मुकेश बताते हैं कि उसके बाद एड्रियाना से रोज फोन पर बात होने लगी लेकिन अंग्रेजी की असमर्थता के चलते बात बमुश्किल 2-3 मिनट खिंच पाती। एड्रियाना को भी मुकेश का हाल-ए-दिल समझने में कुछ वक्त लगा। लेकिन जब एड्रियाना के दिल में भी मुकेश के प्यार का फूल खिला तो फिर वो खुद उसे फोन करने लगीं ताकि मुकेश पर फोन के बिल का भार न पड़े।

चूंकि एड्रियाना कैलीफोर्निया में अपनी मां और बच्ची के साथ रहती थीं, इसलिए इस रिश्ते के बारे में बात करने से हिचकिचा रही थीं। एड्रियाना के दोस्तों ने भी खूब चेताया। यहां तक कि भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के तनावपूर्ण रिश्तों की दुहाई भी दी। लेकिन 16 अगस्त 2013 को एड्रियाना ने भारत के लिए उड़ान भरी। एड्रियाना के स्वागत में मुकेश का पूरा गांव उमड़ पड़ा। मुकेश बताते हैं कि उनकी मां ने एड्रियाना के लिए हलावा और खीर बनाई थी।

मुकेश से शादी के बाद एड्रियाना की जिंदगी उतनी आसान नहीं थी। एयरकंडीशनर तो बहुत दूर की बात हो गई, पंखा था भी तो अक्सर बिजली गुल रहने की वजह से बंद पड़ा रहता था। बाथरूम में शॉवर नहीं था। बर्तन और कपड़ा धोने की मशीने नहीं थीं। ऐसे ठेठ गांव की आम जिंदगी एड्रियाना के सामने थी। लेकिन प्यार सच्चा था इसलिए एड्रियाना ने घर का काम-काज सीखा। खेत पर पति का हाथ बंटाना, गाय-भैंस का दूध दुहना, भारतीय खाना बनाना और खाट पर सोना सब सीख लिया। अंजान शख्स चेहरे-मोहरे से एड्रियाना को भले ही विदेशी करार दें लेकिन इश्क की दीवानगी में उसकी सीरत कब देसी हो गई पता नहीं चला।
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