जलवायु परिवर्तन के खतरे का अध्ययन करने अमेरिका में हिंदी पढ़ रहे छात्रों का एक दल भारत आने वाला है, जो न केवल यहां की गौरवशाली विरासत को समझने का प्रयास करेगा बल्कि भारत की संस्कृति से भी परिचित हो सकेगा। अमेरिकी छात्रों का यह दल मुंबई, राजस्थान और उत्तराखंड की तराई में एक महीने प्रवास करेगा। इसके आधार पर अमेरिका में हिंदी शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।
अशोक ओझा ने बताया कि अमेरिकी हिंदी छात्रों के इस अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर ही अमेरिका में हिंदी शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक महीने की ट्रेनिंग होगी। भारत से लौटे छात्र अमेरिका के तीन प्रमुख विश्वविद्यालय (न्यूयार्क विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस आस्टिन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी) के प्राध्यापकों के साथ काम करेंगे और पाठ्यक्रम तैयार कर जून 2023 से पहले यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन के सुपुर्द कर देंगे। उसके बाद शिक्षा विभाग यह पाठ्यक्रम पूरे अमेरिका में उपलब्ध कराएगा।
अमेरिकी सरकार में हिंदी कार्यक्रम के निदेशक बने अशोक ओझा बताते हैं कि अमेरिका में हिंदी को हेरिटेज भाषा का दर्जा प्राप्त है और सौ विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। ओझा ने अमेरिका में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए ‘युवा हिंदी संस्थान’ व ‘हिंदी संगम फाउंडेशन’ की स्थापना भी की है। उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में स्कूल किराए पर लेकर हिंदी की कक्षाए चलाई जाती हैं। हम छात्रों को भाषा का ज्ञान ही नहीं देते बल्कि उन्हें भारत के बारे में भी बताते हैं। कक्षाओं में भारतीय मूल के अलावा अमेरिकी बच्चे भी हिंदी पढ़ते हैं। कुछ बच्चे तो हिंदी फिल्में देखने के लिए हिंदी पढ़ते हैं।