कहते हैं कि जौहरी को ही हीरे की परख होती है। कुछ इसी तर्ज पर एक अमेरिकी कंपनी ने उत्तर प्रदेश के भदोही और मिर्जापुर आदि जिलों में कार्यरत कालीन के हस्तकला कारीगरों की परख की और उन्हें मंच प्रदान किया है।
अमेरिकी कंपनी ‘पेरेनियल्स’ ने मशीन की बजाय हस्तकला कारीगरों के जरिए कालीन का उत्पादन कर विश्व के 12 देशों में निर्यात कर रहा है और अब इस कंपनी नें एशिया का पहला शो रूम दक्षिण मुंबई के कोलाबा में शुरू किया है।
कभी कालीन उद्योग में पहले नंबर पर रहे भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन के आगे पिछड़ गया था, लेकिन अब अमेरिकी कंपनी पेरेनियल्स के भारत में कालीन उद्योग लगाने से इस कारोबार में संभावनाएं बढ़ी हैं।
कंपनी के सीईओ एन सदरलैंड ने कहा कि भारत में हमारे लिए बड़ी संभावना है। कालीन बनाने की पारंपरिक भारतीय शैली का इस्तेमाल कर हम खूबसूरत कालीन तैयार कर उसे दुनियाभर में उपलब्ध करा रहे हैं।
कंपनी के प्रबंध निदेशक अमोल बिनीवाले ने बताया कि हमने अपने कालीन उद्योग की शुरुआत 350 कारीगरों से की थी। पिछले साल कंपनी ने एक लाख वर्ग फुट आलीशान कालीन तैयार कर निर्यात किया। अगले तीन महीनों में कारीगरों की संख्या बढ़ कर एक हजार हो जाएगी।
फिलहाल, हम वडोदरा में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व बिहार के कारीगरों द्वारा निर्मित कालीन दुनिया के 12 देशों में निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुंबई के बाद अगले साल कालीन और फर्नीचर का शो रूम दिल्ली में खोला जाएगा।