मुजफ्फरनगर के खतौली में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसे ने सैकड़ों रोते-बिलखते लोगों से उनके अपनों को छीन लिया। इस हादसे में हादसे में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई। जबकि 81 से अधिक घायल हुए हैं।
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रेलवे ने इस दर्दनाक हादसे में आतंकी साजिश से इंकार करते हुए विभाग की लापरवाही माना है। बताया गया कि कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की 14 बोगियां शनिवार की शाम पटरी से उतर गईं।गौरतलब है कि खतौली में हुए रेल हादसे के पीछे रेलवे की लापरवाही भी सामने आ रही है।
शुक्रवार रात में ही पटरी में क्रेक आ गया था और क्षतिग्रस्त ट्रैक से ही करीब 12 ट्रेनें गुजरीं। शनिवार सुबह पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक क्षतिग्रस्त होने का पता चला। जिसके बाद सभी ट्रेनें को धीमी गति से निकलवाया गया और क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को बदला गया था।
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ट्रैक क्षतिग्रस्त होने की जानकारी के बाद भी रेलवे विभाग इस हादसे को नहीं रोक पाया, इससे कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब रेलवे का आधारभूत ढ़ांचा ही ठीक नहीं है तो इसमें बुलेट ट्रेन की कल्पना कैसे की जा सकती है। पहले रेलवे के आधारभूत ढ़ांचे को सुधार करने की जरूरत है। एक आकड़े के मुताबिक पिछले 5 सालों में अब तक 586 रेल दुर्घनाएं हो चुकी हैं।
इस पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या आप मानते हैं कि बुलेट ट्रेन से ज्यादा रेलवे के आधारभूत ढ़ांचे में सुधार की जरूरत है?' इस सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 13,245 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। पोल में सबसे अधिक 94.51 फीसदी यानि 12,518 पाठकों ने माना कि बुलेट ट्रेन से ज्यादा रेलवे में आधारभूत ढ़ांचे में सुधार की जरूरत है। जबकि मात्र 4.18 फीसदी यानि 553 पाठक उपरोक्त सवाल से सहमत नहीं हुए। वहीं,1.31 फीसदी यानि 174 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।