भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने नक्सलवाड़ी में 25 अप्रैल को दलित दंपत्ति राजू और गीता के साथ लंच किया था। लेकिन इसके ठीक एक हफ्ते बाद दोनों पति-पत्नी बीजेपी का साथ छोड़ गए।
दंपत्ति ने अब सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का दाम थाम लिया है। वहीं बीजेपी ने आरोप लगाय कि ममता की पार्टी ने जबरन दोनों नेताओं को अपने साथ मिलाया है। हालांकि टीएमसी का कहना है कि दोनों अपनी मर्जी से तृणमूल में शामिल हुए हैं।
गौरतलब है कि लंच के दौरान शाह को केले के पत्ते में खाना परोसा गया था। उन्होंने कहा था कि टीएमसी चाहे जितनी भी घृणा और हिंसा का कीचड़ फैलाए लेकिन राज्य में ज्यादा से ज्यादा कमल खिलना तय है।
इसी मुद्दे पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आप मानते हैं कि टीएमसी की इस चाल से बंगाल में भाजपा की उम्मीदों को लगा है झटका?
पोल के जवाब में हमें कुल 8926 वोट मिले। इनमें 39.67% (3541) लोगों ने हां में जवाब दिया, जबकि 57.23% (5108) लोगों ने कहा कि टीएमसी की इस चाल से बंगाल में भाजपा की उम्मीदों को झटका नहीं लगा है।' वहीं 3.1% (277) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर नहीं की।