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अमरनाथ यात्रा का फुलप्रूफ प्लान: सेना-CAPF के 55 हजार जवान होंगे तैनात, 'छोटी मिसाइल-ड्रोन-IED' हैं चुनौती

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amarnath yatra 2026 - फोटो : amar ujala
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जम्मू-कश्मीर में तीन जुलाई से पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने का फुलप्रूफ प्लान तैयार कर लिया है। यात्रा मार्ग पर सेना/सीएपीएफ के 50 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया इकाई को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य में लगभग पचास विदेशी दहशतगर्द और दर्जनों ओवर ग्राउंड वर्कर भी सक्रिय हैं। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा के दौरान छोटी मिसाइल यानी हैंड ग्रेनेड से हमला, ड्रोन-अटैक, फिदायीन हमला और आईईडी से नुकसान पहुंचाना, यह खतरा बना रहेगा। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने उक्त खतरों का तोड़ निकाल लिया है।  
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आठ जून को गृह मंत्री शाह करेंगे बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आठ जून को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा एवं दूसरी तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव, डीजीपी, सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। खुफिया इकाई के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में छिपे 50 से ज्यादा पाकिस्तानी दहशतगर्द, अमरनाथ यात्रा में बाधा डालने का प्रयास कर सकते हैं। इस बाबत सभी केंद्रीय एजेंसियों, सेना, सीएपीएफ और जेकेपी को अवगत कर दिया गया है। गत वर्ष पहलगाम हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सुरक्षा बलों के शीर्ष अफसरों के साथ बैठक करने के लिए जम्मू पहुंचे थे।
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यात्रा रूट पर हैं ये संभावित खतरे 
  • 'छोटी मिसाइल' का इस्तेमाल कर सकते हैं आतंकी 
  • यात्रा रूट पर 'ड्रोन' से बम गिराना  
  • फिदायीन अटैक के खतरे से इनकार नहीं     
  • यात्रा मार्ग पर आईईडी का जोखिम  
  • वाहनों पर चिपकने वाला बम लगाना 
  • आतंकियों के मददगार ओवर ग्राउंड वर्कर 
  • यात्रा में टारगेट किलिंग का खतरा 

सुरक्षा बलों का ये है फुलप्रूफ प्लान
  • आर्मी व जेकेपी के अलावा सीएपीएफ के 50000 जवान तैनात 
  • फिदायीन अटैक रोकने के लिए जरूरी दिशा निर्देश 
  • मल्टी एजेंसी सेंटर में सुरक्षा बलों का त्वरित तालमेल 
  • सीमा पार से आने वाले ड्रोन पर नजर  
  • हैंड ग्रेनेड व आईईडी हमला रोकने के लिए विशेष दस्ते  
  • वाहनों में चिपकू बम का पता लगाने के लिए फोर्स की तैनाती 
  • ओवर ग्राउंड वर्कर के लिए मानवीय/तकनीकी इंटेलिजेंस  
  • रसद सामग्री वाले स्थानों पर ड्रोन से नजर, स्केनर की मदद  
  • यात्रियों शिविरों के आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा  
  • यात्रा मार्ग पर सुरक्षा बलों के खोजी कुत्ते तैनात  
  • ड्रोन को मार गिराने के लिए केंद्रीय बलों के शूटर  
  • रोड ओपनिंग पार्टी के अलावा एक हजार मीटर पर सुरक्षा कर्मी  
  • हाई अलर्ट सड़कों पर सामान्य ट्रैफिक रोकना, हेलिकॉप्टर से गश्त   

घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली का इस्तेमाल 
अमरनाथ यात्रा के दौरान ओएफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन और रात निगरानी करने वाले कैमरों की मदद ली जाएगी। ये उपकरण 'व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली' (सीआईबीएमएस) का हिस्सा होंगे। इनकी मदद से यात्रा के रूट पर घुसपैठ का पता लगाया जा सकेगा। ओवर ग्राउंड वर्कर, आतंकियों को जरुरी सूचनाएं एवं ट्रांसपोर्ट की सुविधा मुहैया कराते हैं। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के जम्मू कश्मीर में मौजूद मुखौटे आतंकी संगठन जैसे 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और पीएएफएफ की गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। ये आतंकी संगठन, ओवर ग्राउंड वर्कर की मदद से हमले को अंजाम देते हैं।
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यात्रा रूट पर केंद्रीय बलों के खोजी कुत्ते
केंद्रीय बलों के खोजी कुत्तों को यात्रा रूट पर लगाया जा रहा है। ये कुत्ते संदिग्ध सामान की जांच में विशेष सहयोग करते हैं। खोजी कुत्ते जमीन में चार फुट नीचे दबी विस्फोटक सामग्री खोज निकालते हैं। संदिग्ध व्यक्ति अगर इनकी नजर में आ जाए तो संबंधित केंद्रीय बल तक वह जानकारी पहुंच जाती है। एक खोजी कुत्ता चार-पांच किलोमीटर का रास्ता तय कर यह सुनिश्चित करता है कि आगे की राह ठीक है। अगर कोई खतरा है तो खोजी कुत्ता उसे भांप लेता है। खोजी कुत्ते की सूंघने की क्षमता चार किलोमीटर दूरी तक होती है। उसके बाद कुत्ते को गाड़ी में बैठा दिया जाता है। दूसरे कुत्ते को डयूटी पर उतारा जाता है। अमरनाथ यात्रा के लिए जवाहर टनल से निकलने वाले दोनों रास्ते, पहलगाम और बालटाल के करीब दो सौ किलोमीटर लंबे रूट को यही खोजी कुत्ते क्लीयर करते हैं। प्लास्टिक बैग या टिफिन बॉक्स में रखी विस्फोटक सामग्री तलाशने के लिए इन कुत्तों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 
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