सवाल: पाकिस्तान ने दोबारा पहलगाम जैसी हरकत की तो क्या हमारी नौसेना तैयार है?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर बिल्कुल अलग था। हमारा नेतृत्व बहुत अलग था। राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व का रुख साफ था। अच्छी बात यह है कि भारत पहले ही कई सारे हमले झेल चुका था। तो भारत ने इन सबको सोचते हुए पाकिस्तान को जवाब दिया।
सवाल: ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को भारत ने कैसे निशाना बनाया?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: परमाणु मुद्दों पर ज्यादा चर्चा नहीं की जानी चाहिए। इस पर अंदरूनी तौर पर काफी चर्चा होती है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना तैयार थी। नौसेना भी अलर्ट थी। मार्च में ही नौसेना अभ्यास कर चुकी थी। इसलिए पहलगाम के बाद हमने तेजी और मुस्तैदी से जवाब दिया।
सवाल: इस्राइल-ईरान जंग में अमेरिका ने अपनी नौसेना का इस्तेमाल किया था, तो आगे कभी युद्ध हुआ तो भारत भी क्या ऐसा करेगा?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर में भारत के जहाजों पर 600 मिसाइल तैनात थीं। भारत की नौसेना आगे भी तैयार है। जब संघर्ष होता है सभी सेनाएं एक समय पर अपना काम करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भले ही नौसेना को जवाब देने का मौका नहीं मिला लेकिन नौसेना तैयार थी। शायद इसलिए सीजफायर हुआ।
सवाल: पाकिस्तान के साथ सीजफायर क्यों किया गया?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: पाकिस्तान के पास कुछ खोने को नहीं है। पाकिस्तान ने जब गुहार लगाई तो भारत ने सीजफायर किया। यह संघर्ष ज्यादा दिन चलता तो हमारे नागरिक भी प्रभावित होते।
सवाल: राष्ट्र रक्षा का संकल्प केवल सैनिकों का है या देश नागरिकों को भी लेना चाहिए?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: राष्ट्र रक्षा का संकल्प सभी का है। बच्चे फौज में जाते हैं तो यह अच्छा है। विकसित भारत के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। ब्रह्मोस उत्तर प्रदेश में बन रही है। मध्यप्रदेश में टैंक बन रहे हैं। राष्ट्र रक्षा में सबका सहयोग जरूरी है। विकास तभी होगा जब सुरक्षा होगी। आने वाले पीढ़ियां विकसित होंगीं।
सवाल: सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे
पाकिस्तानी प्रोपैगैंडा से देश के लोग कैसे बचें?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: तकनीक अच्छाई भी लाती है और बुराई भी लाती है। लोग व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर देश विरोधी कोई पोस्ट साझा न करें। लोग ऐसा न करके देश का सहयोग कर सकते हैं। लोग साइबर सिक्योरिटी के तहत राष्ट्र की रक्षा और देशहित में काम कर सकते हैं।
सवाल: युद्ध डर पैदा करते हैं या उत्साह?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: अमेरिका युद्ध के जरिये अपना व्यापार बढ़ाता है। इसलिए वे संघर्ष से उत्साहित होते हैं। मगर युद्ध भारत की प्रगति में रोड़ा बनता है। हाल के युद्धों को देखें तो भारत काफी प्रभावित हुआ है। इसलिए युद्ध नहीं होने चाहिए।
सवाल: दुश्मन हमला करें तो क्या हमें युद्ध करना चाहिए?
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर स्थगित हुआ है। सरकार बेहद साफ है कि अब अगर कोई हमला होगा तो जवाब दिया जाएगा। इसमें कोई संशय नहीं है कि अब अगर आतंकवाद फैलाया जाएगा तो भारत आत्मरक्षा करेगा। पहले भी सारी स्ट्राइक ऐसी हुई हैं। न्यायोचित अधिकार के लिए युद्ध में जाना पाप नहीं है। इसमें सबको अपनी भागीदारी करनी होगी।
भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर हैं। 2023 में सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने 2021 से पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एफओसी-इन-सी) के रूप में कार्य किया। इससे पहले उन्होंने भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एफओसी-इन-सी) के रूप में कार्य किया। इस नियुक्ति से पहले उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया। वे एकीकृत रक्षा स्टाफ (सिद्धांत संगठन प्रशिक्षण) के उप-प्रमुख भी थे।
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राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) एबी सिंह को 01 जुलाई 1983 को भारतीय नौसेना में नियुक्त किया गया था। वे नेविगेशन और एयरक्राफ्ट डायरेक्शन के विशेषज्ञ हैं। उनकी महत्वपूर्ण विशेषज्ञ नियुक्तियों में ऑपरेशन पवन के दौरान INS कामोर्टा और विध्वंसक INS रंजीत के के नेविगेटिंग ऑफिसर के अलावा ऑपरेशन पराक्रम के दौरान पश्चिमी बेड़े के फ्लीट नेविगेटिंग ऑफिसर शामिल हैं।
कई नौसैन्य जहाजों की कमान संभाली
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने नौसैन्य जहाजों वीर (मिसाइल पोत), विंध्यगिरी (फ्रिगेट), त्रिशूल (गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट) और विराट (एयरक्राफ्ट कैरियर) की कमान संभाली है। वह एनडीए, खड़कवासला, नेविगेशन एंड डायरेक्शन स्कूल, कोच्चि में प्रशिक्षक और डीएसएससी वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ भी रहे हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना योजना निदेशालय में उप निदेशक और प्रधान निदेशक के रूप में काम किया है। उन्होंने प्रधान निदेशक के रूप में रणनीति, अवधारणा और परिवर्तन निदेशालय की भी स्थापना की थी।
VSM, AVSM, PVSM से सम्मानित
2012 में फ्लैग रैंक में पदोन्नत होने के बाद से उन्होंने नौसेना मुख्यालय में फ्लैग ऑफिसर एओबी प्रोजेक्ट, असिस्टेंट चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (नीति और योजना) और फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट के पदों पर कार्य किया। राष्ट्र के प्रति उनकी अनुकरणीय सेवा के लिए फ्लैग ऑफिसर को 2011 में विशिष्ट सेवा पदक, 2016 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2022 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।